हिंसा न करें
सव्वेसिं जीवियं पियं,
नाइवाएज्ज कंचणं
नाइवाएज्ज कंचणं
सबको जीवन प्रिय है, किसीके प्राणों का अतिपात नहीं चाहिये
सिंह-सी निर्भयता
सीहो व सद्देण न संतसेज्जा
सिंह के समान निर्भीक; केवल शब्दों से न डरिये
यथावादी तथाकारी
करणसच्चे वट्टमाणे जीवे
जहावाई तहाकारी या वि भवइ
जहावाई तहाकारी या वि भवइ
करणसत्य में रहनेवाला जीव जैसा बोलता है, वैसा ही करता है
स्नेह और तृष्णा
वीयरागयाएणं नेहाणुबंधणाणि,
तण्हाणुबंधणाणि य वोच्छिन्दइ
तण्हाणुबंधणाणि य वोच्छिन्दइ
वीतरागता से स्नेह औ तृष्णा के बन्धन कट जाते हैं
वाणी के गुण
मियं अदुट्ठं अणुवीइ भासए,
सयाण मज्झे लहइ पसंसणं
सयाण मज्झे लहइ पसंसणं
जो विचारपूर्वक परिमित और निर्दोष वचन बोलता है, वह सज्जनों के बीच प्रशंसा पाता है
सच्चाई को जानिये
पुरिसा! सच्चमेव समभिजाणाहि
हे पुरुष! तू सत्य को ही अच्छी तरह जान ले
धर्मानुकूल आजीविका
धम्मेणं चेव वित्तिं कप्पेमाणा विहरंति
सद्गृहस्थ धर्मानुकूल ही आजीविका करते हैं
थूक न चाटें
से मइमं परिय मा य हु लालं पच्चासी
बुद्धिमान साधक लार चाटने वाला न बने अर्थात् परित्यक्त भोगों की पुनः कामना न करे
गर्भ में आते हैं
माई पमाई पुण एइ गब्भं
मायावी और प्रमादी फिर से गर्भ में आते हैं


















