बार बार चाबुक की मार खाने वाले गलिताश्व (अड़ियल टट्टू) की तरह कर्तव्यपालन के लिए बार-बार गुरुओं के निर्देश की अपेक्षा मत रखो
अड़ियल टट्टू
मा गलियस्सेव कसं, वयणमिच्छे पुणो पुणो
नित्य करने के लिए जो कर्त्तव्य निर्दिष्ट हो, उसे बिना कहे स्वयं प्रेरणा से प्रतिदिन करते रहने में ही शिष्य की शोभा है| विवेकी सुविनीत शिष्य ऐसा ही करते हैं और अपने गुरुओं के हृदय में स्थान पा लेते हैं| Continue reading “अड़ियल टट्टू” »
बन्धनमुक्त नहीं हो सकता
न यावि मोक्खो गुरुहीलणाए
गुरुजनों की अवहेलना करनेवाला कभी बन्धनमुक्त नहीं हो सकता|
पूछ कर लीजिये
अणुविय गेण्हियव्वं
अनुज्ञा लेकर (ही कोई वस्तु) ग्रहण करनी चाहिये
विद्या और आचरण
आहसु विज्जाचरणं पमोक्खं
विद्या और आचरण से ही मोक्ष बताया गया है
मार्ग में घर
संसयं खलु सो कुणइ
जो मग्गे कुणई घरं
जो मग्गे कुणई घरं
साधना में संशय वही करता है, जो मार्ग में घर करना (ठहरना) चाहता है
गुरु विनय
जस्संतिए धम्मपयाइं सिक्खे,
तस्संतिए वेणइयं पउंजे
तस्संतिए वेणइयं पउंजे
जिसके निकट रह कर धर्म के पद सीखे हों, उसके प्रति विनयपूर्ण व्यवहार रखना चाहिये
जीव विचार – गाथा 5
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सुखद और दुःखद
खणमित्तसुक्खा बहुकालदुक्खा
विषयभोग क्षणमात्र सुख देते हैं, किंतु बहुकाल पर्यन्त दुःख देते हैं
कर्मों से कष्ट
सकम्मुणा विप्परियासुवेइ
अपने किये कर्मों से ही व्यक्ति कष्ट पाता है
भगवती अहिंसा
भगवती अहिंसा…. भीयाणं पि व सरणं
भगवती अहिंसा भीतों (डरे हुओं) के लिए शरण के समान है

















