असिधारागमणं चेव, दुक्करं चरिउं तवो
तपश्चरण तलवार की धार पर चलने के समान दुष्कर है
तपश्चरण तलवार की धार पर चलने के समान दुष्कर है
लोभ सब कुछ नष्ट कर देता है
सुव्रती व्यक्ति कम खाये, कम पीये और कम बोले
जो खा-पीकर आराम से सोता है, वह पापश्रमण कहलाता है
आत्मा ही सुख दुःख का कर्त्ता और भोक्ता है
हम अच्छे कार्य करते हैं; तो अपने लिए सुख का निर्माण करते हैं और यदि बुरे कार्य करते हैं; तो दुःख का निर्माण करते हैं| इस प्रकार हम स्वयं ही सुख-दुःख के निर्माता हैं, बनाने वाले हैं| Continue reading “कर्त्ता – भोक्ता” »
असंवृत मनुष्य मोहित हो जाते हैं
ज्ञानहीन व्यक्ति क्या करेगा? वह पुण्य पाप को कैसे जानेगा?
आतंकदर्शी पाप नहीं करता
क्रोध प्रीति का नाशक है
समझो! क्यों नहीं समझते मरने पर संबोध निश्चित रूप से दुर्लभ है