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गुणाकांक्षा

गुणाकांक्षा

कङ्खे गुणे जाव सरीरभेऊ

जब तक शरीरभंग (मृत्यु) न हो तब तक गुणाकांक्षा रहनी चाहिये

जब तक शरीर नष्ट नहीं हो जाता अर्थात् मृत्यु नहीं हो जाती, तब तक हमें निरन्तर गुणों की कामना करते रहना चाहिये|

विषयों की तो सभी प्राणी कामना करते रहते हैं; किंतु विवेकी व्यक्ति गुणों की कामना करते हैं| Continue reading “गुणाकांक्षा” »

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खून का दाग खून से नहीं धुलता

खून का दाग खून से नहीं धुलता

रुहिरकयस्स वत्थस्स रुहिरेणं चेव
पक्खालिज्जमाणस्स णत्थि सोही

रक्त-सना वस्त्र रक्त से ही धोया जाये तो वह शुद्ध नहीं होता

आग को आग से नहीं बुझाया जा सकता| कुत्ता यदि हमें काट खाये; तो इसका उपचार यह नहीं हो सकता कि हम भी कुत्ते को काट खायें| इसी प्रकार गाली का बदला गाली से या मारपीट का बदला मारपीट से नहीं चुकाया जा सकता| Continue reading “खून का दाग खून से नहीं धुलता” »

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ममता का बन्धन

ममता का बन्धन

ममत्तं छिंदए ताए, महानागोव्व कंचुयं

आत्मसाधक ममत्व के बन्धन को तोड़ फेंके; जैसे महानाग कञ्चुक को उतार देता है

सॉंपों के शरीर पर एक झिल्लीदार पतला चमड़ा होता है, जो हर साल गिर जाता है| उसे संस्कृत में कंचुक और हिन्दी में केंचुली कहते हैं| अजगर जिस प्रकार वर्षभर तक एक केंचुली की खोज में रहकर भी उसके प्रति आसक्ति नहीं रखता और ज्यों ही वर्ष समाप्त होता है, वह तत्काल अपनी केंचुली छोड़ कर अन्यत्र चला जाता है| Continue reading “ममता का बन्धन” »

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प्रशंसा हो या निंदा, सत्कर्म करते रहो

प्रशंसा हो या निंदा, सत्कर्म करते रहो

न प्रहृष्येत्प्रियं प्राप्य नोद्विजेत् प्राप्य चाप्रियम्
एक दिन एक संत अपने शिष्य को लेकर कहीं जा रहे थे| वह रास्ता बाजार से होकर निकलता था| दोनों ओर तरह-तरह की दुकानें लगी थी| Continue reading “प्रशंसा हो या निंदा, सत्कर्म करते रहो” »

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ऋतु (मासिक) धर्म का पालन

ऋतु (मासिक) धर्म का पालन
मदनसेना ! ऋतुस्त्राव-रजोदर्शन को मासिक-धर्म कहते हैं| स्वास्थ्य के लिये इस का मास के अंत में होना आवश्यक है| यदि मासिक-धर्म ठीक समय और बिना कष्ट के उचित मात्रा में न हो तो शीघ्र ही उसकी चिकित्सा करना चाहिये| इसमें संकोच और विलंब करना बड़ा घातक है| Continue reading “ऋतु (मासिक) धर्म का पालन” »

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यह पुण्य से मिला है

यह पुण्य से मिला है

शुभानुबन्ध्यतः पुण्यं कर्त्तव्यं सर्वथा नरैः
उत्तम कुल में जन्म पुण्य से मिला है|

उत्तम मां-बाप पुण्य से मिले हैं|

मानव का देह पुण्य से मिला है| Continue reading “यह पुण्य से मिला है” »

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मन क्या है?

मन क्या है?
इसे न तो तुम्हारी तेज आँखे देख सकती हैं न हाथ ही उसे अपने आधीन रख सकते हैं| मन का न कोई रुप है, न रंग, न आकार| वह विचित्र है, सब देखता है, सब सुनता है| हम जिस शक्ति द्वारा सुख-दु:ख का अनुभव करते हैं उसी अदृश्य शक्ति का नाम है मन| Continue reading “मन क्या है?” »

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Quote #12

Our hardest problems reveal our greatest possibilities.
Unknown
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इन शब्दों को न भूलो

इन शब्दों को न भूलो
1. मृदु स्वभाव, सदा हँस कर बोलो|

2. माता-पिता, भाई-बहन, सास-ससुर, ननद-जेठानी आदि परिवार से प्रेम रखो|

3. परिश्रमी स्वभाव, कभी बेकार न रहना|

4. बड़ों की सेवा, उनका आदर, छोटों के प्रति स्नेह रखना| Continue reading “इन शब्दों को न भूलो” »

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Motivational Wallpaper #50

जितना ऊपर उठना हो उतने ऊँचे विचार चाहिये

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