नो पूयणं तवसा आवहेज्जा
तप के द्वारा पूजा (प्रतिष्ठा) की अभिलाषा नहीं करनी चाहिये
तप के द्वारा पूजा (प्रतिष्ठा) की अभिलाषा नहीं करनी चाहिये
जीव अन्य है, शरीर अन्य
पहले जो जैसा कर्म किया गया है, भविष्य में वह उसी रूप में उपस्थित होता है
अज्ञ अभिमान करते हैं
चढ़ाई के मार्ग में बूढे बैलों की तरह साधनामार्ग की कठिनाई में अज्ञ लोग खि होते हैं
सुव्रती व्यक्ति कम खाये, कम पीये और कम बोले
असंवृत मनुष्य मोहित हो जाते हैं
समझो! क्यों नहीं समझते मरने पर संबोध निश्चित रूप से दुर्लभ है
साधक को कोई यदि दुर्वचन कहे; तो भी वह उस पर क्रोध न करे