1 0 Archive | सूत्रकृतांग सूत्र RSS feed for this section
post icon

अज्ञ कौन है ?

अज्ञ कौन है ?

बालो पापेहिं मिज्जति

अज्ञ पापों पर घमण्ड करता है

कार्य दो तरह के होते हैं – भले और बुरे| भले कार्य पुण्य और बुरे कार्य पाप कहलाते हैं| Continue reading “अज्ञ कौन है ?” »

Leave a Comment
post icon

वैर-विरोध मत कीजिये

वैर विरोध मत कीजिये

न विरुज्झेज्ज केण वि

किसी के साथ वैर-विरोध मत करो

पूर्वजन्म में किये गये शुभाशुभ कर्मों के ही अनुसार इस जन्म में अनुकूल या प्रतिकूल परिस्थिति प्राप्त होती है| भ्रम से लोग यह समझ बैठते हैं कि अमुक व्यक्ति हमारा विरोधी है – वैरी है और हमारे सारे कष्ट उसीके द्वारा पैदा किये हुए हैं, हमारी प्रतिकूल परिस्थिति का जन्मदाता भी वही है| परन्तु बात ऐसी नहीं है| Continue reading “वैर-विरोध मत कीजिये” »

Leave a Comment
post icon

सूक्ष्म शल्य

सूक्ष्म शल्य

सुहुमे सल्ले दुरुद्धरे

सूक्ष्म शल्य बड़ी कठिनाई से निकाला जा सकता है

जो लोग पैदल चलते हैं, उन्हें मार्ग में कॉंटे चुभ जायें तो वे क्या करते हैं? दूसरे कॉंटे से अथवा सूई से निकाल लेते हैं| यद्यपि कॉंटा निकल जाने पर भी वेदना बनी रहती है, फिर भी कुछ समय बाद मिट जाती है और कुछ दिन बाद तो उसका छेद भी गायब हो जाता है| चमड़ीसे चमड़ी मिल जाती है| Continue reading “सूक्ष्म शल्य” »

Leave a Comment
post icon

अतिवेल न बोलें

अतिवेल न बोलें

नाइवेलं वएज्जा

अधिक समय तक एवं अमर्याद न बोलें

‘वेला’ का अर्थ समय भी होता है और मर्यादा भी; इसलिए इस सूक्ति के दो अर्थ होते हैं| Continue reading “अतिवेल न बोलें” »

Leave a Comment
post icon

अधिक न हँसे

अधिक न हँसे

अतिवेलं न हसे मुणी

मुनि कभी मर्यादा से अधिक न हँसे

हँसना और सदा हँसमुख रहना स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है | जो व्यक्ति उदास बन कर दिनभर मुँह फुलाये हुए बैठा रहता है – सबको अपना दुःखड़ा सुनाता रहता है – दूसरों के साथ मारपीट और बकझक करता रहता है, ऐसा चिड़चिड़ा आदमी क्या कभी स्वस्थ रह सकता है ? कभी नहीं| Continue reading “अधिक न हँसे” »

Leave a Comment
post icon

अनन्तसुख का नाश मत कीजिये

अनन्तसुख का नाश मत कीजिये

माएयं अवमन्जंता, अप्पेणं लुंपहा बहुं

सन्मार्ग का तिरस्कार करके अल्प सुख (विषयसुख) के लिए अनन्त सुख (मोक्षसुख) का विनाश मत कीजिये

यदि कोई हीरे के बदले कङ्कर ले ले तो उसे आप क्या समझेंगे ? आप समझेंगे, वह मूर्ख है| सुमार्ग के बदले कुमार्ग को अपनाने वाले भी ऐसे ही मूर्ख हैं| Continue reading “अनन्तसुख का नाश मत कीजिये” »

Leave a Comment
post icon

समय पर पूरा कीजिये

समय पर पूरा कीजिये

जेहिं काले परक्कंतं,
न पच्छा परितप्पए

जो समय पर अपना काम कर लेते हैं, वे बाद में पछताते नहीं है

जो आलस्यवश अपना कर्त्तव्य समय पर पूरा नही करते, वे बाद में पछताते हैं, परन्तु उससे लाभ क्या? जिसे पौधे को सूखने से पहले सिंचित नहीं किया, उसके लिए बाद में बैठे-बैठे पछताने से क्या वह हराभरा हो जायेगा? कभी नहीं| Continue reading “समय पर पूरा कीजिये” »

Leave a Comment
post icon

आस्रव-संवर

आस्रव संवर

समुप्पायमजाणंता, कहं नायंति संवरं|

आस्रव को न जानने वाले संवर को कैसे जान सकते है?

एक विशाल सरोवर की कल्पना कीजिये| उसमें एक नौका तैर रही है| नौका में अनेक यात्री बैठे हैं| धीरे-धीरे नौका डूबने लगती है| नौका में पानी का प्रवेश होने लगता है| यात्री डूबने के डर से चिल्लाते हैं – ‘अरे इस पानी को रोको-जैसे भी बने इस पानी का आना बन्द करो! Continue reading “आस्रव-संवर” »

Leave a Comment
post icon

विद्या और आचरण

विद्या और आचरण

आहसु विज्जाचरणं पमोक्खं

विद्या और आचरण से ही मोक्ष बताया गया है

जिस प्रकार चलने के लिए चक्षु और चरण – दोनों आवश्यक हैं, उसी प्रकार मोक्ष की प्राप्ति के लिए भी ज्ञान और क्रिया दोनों आवश्यक हैं| Continue reading “विद्या और आचरण” »

Leave a Comment
post icon

कर्मों से कष्ट

कर्मों से कष्ट

सकम्मुणा विप्परियासुवेइ

अपने किये कर्मों से ही व्यक्ति कष्ट पाता है

दुनिया में विषमता है| कोई जन्म ले रहा है, कोई जन्म दे रहा है – कोई जी रहा है, कोई मर रहा है – कोई धन पा रहा है, कोई खो रहा है – कोई जाग रहा है, कोई सो रहा है – कोई हँस रहा है, कोई रो रहा है – कोई सुखी है, कोई दुःखी| Continue reading “कर्मों से कष्ट” »

Leave a Comment
Page 2 of 612345...Last »