जेहिं काले परक्कंतं,
न पच्छा परितप्पए
न पच्छा परितप्पए
जो समय पर अपना काम कर लेते हैं, वे बाद में पछताते नहीं है
जो समय पर अपना काम कर लेते हैं, वे बाद में पछताते नहीं है
ज्ञानी और सदाचारी मृत्युपर्यन्त त्रस्त (भयाक्रान्त) नहीं होते
बिना पूछे कुछ भी नहीं बोलना चाहिये और पूछे जाने पर भी असत्य नहीं बोलना चाहिये
आस्रव को न जानने वाले संवर को कैसे जान सकते है?
बार बार चाबुक की मार खाने वाले गलिताश्व (अड़ियल टट्टू) की तरह कर्तव्यपालन के लिए बार-बार गुरुओं के निर्देश की अपेक्षा मत रखो
गुरुजनों की अवहेलना करनेवाला कभी बन्धनमुक्त नहीं हो सकता|
अनुज्ञा लेकर (ही कोई वस्तु) ग्रहण करनी चाहिये
जिसके निकट रह कर धर्म के पद सीखे हों, उसके प्रति विनयपूर्ण व्यवहार रखना चाहिये
साधना में संशय वही करता है, जो मार्ग में घर करना (ठहरना) चाहता है
विद्या और आचरण से ही मोक्ष बताया गया है