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क्रुद्ध न हों

क्रुद्ध न हों

अणुसासिओ न कुप्पिज्जा

अनुशासन से क्रुद्ध नहीं होना चाहिये

माता-पिता एवं गुरुजन हमसे बड़े होते हैं – अधिक अनुभवी होते हैं| वे हमें सुधारने के लिए – कुमार्ग से हटा कर हमें सुमार्ग पर ले जाने के लिए निरन्तर प्रयत्नशील रहते हैं| इस प्रयत्न के सिलसिले में अनेक बार वे हमारी आलोचना करते हैं- अनेक बार हमारे दोष बताते हैं और उनसे बचने का उपदेश देते हैं| बार-बार एक ही अपराध करने पर वे हमें डॉंट-फटकार भी बताते हैं अर्थात् ताड़ना-तर्जना भी करते हैं| Continue reading “क्रुद्ध न हों” »

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प्रेम का नाशक

प्रेम का नाशक

कोहो पीइं पणासेइ

क्रोध प्रीति का नाशक है

प्रेम और क्रोध दोनों किसी स्थान पर एक साथ नहीं रह सकते | जब क्रोध होगा, प्रेम नहीं होगा और जब प्रेम होगा, क्रोध नहीं होगा| दोनों गुण एक दूसरे के विरोधी हैं – एक दूसरे के नाशक हैं| Continue reading “प्रेम का नाशक” »

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अभयदान

अभयदान

दाणाण सेट्ठं अभयप्पयाणं

अभयदान श्रेष्ठ दान है

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भगवान पार्श्वनाथ – जन्म कल्याणक

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संयम और सुख

संयम और सुख

अप्पं दंतो सुही होई,
अस्सिं लोए परत्थ य

अपने पर नियन्त्रण रखनेवाला ही इस लोक तथा परलोक में सुखी होता है

संयम सुख का स्रोत्र है| अपनी समस्त मनोवृत्तियों पर अंकुश रखना संयम है| मनोवृत्तियॉं चंचल होती हैं – क्षणिक होती हैं| उन पर अंकुश कौन रख सकता है? Continue reading “संयम और सुख” »

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Motivational Wallpaper #43

जैसे व्यवहार की तुम दूसरों से अपेक्षा रखते हो, वैसा ही व्यवहार तुम दूसरों के प्रति करो

Standard Screen Widescreen
800×600 1280×720
1024×768 1280×800
1400×1050 1440×900
1600×1200 1920×1080  
  1920×1200  
  2560×1440  
  2560×1600  

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कायोत्सर्ग

कायोत्सर्ग

वोसिरे सव्वसो कायं, न मे देहे परीसहा

सर्वथा काया को मोह छोड़ता हूँ – मेरी देह पर कोई परीषह जैसे है ही नहीं

‘काउसग्ग’ एक पारिभाषिक शब्द है, जिसे संस्कृत में ‘कायोत्सर्ग’ कहते हैं| यह शब्द काया+उत्सर्ग से बना है| काया शरीर को कहते हैं और उत्सर्ग त्याग को; परन्तु कायोत्सर्ग का अर्थ ‘शरीर का त्याग’ नहीं है| इसका अर्थ है शरीर के मोह का त्याग| कायोत्सर्ग के बाद ही ध्यान में एकाग्रता आ सकती है| Continue reading “कायोत्सर्ग” »

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अपने धड़कते दिल से पूछो

अपने धड़कते दिल से पूछो
जिंदगी थोड़ी है, समय उससे भी कम| जैसे जैसे समय बीतता है, वैसे वैसे हम मृत्यु के निकट पहुँचते जाते हैं| आँखे खोल कर श्मशान की तरफ जाते हुए मुरदों की तरफ देखो और सोचो कि एक दिन हमारी भी यही हालत होगी| फिर क्यों न हम अनंत भव भटकने के बाद प्राप्त अति दुर्लभ अनमोल मानव भव को सफल बना ले| Continue reading “अपने धड़कते दिल से पूछो” »

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Quote #6

The bird wishes it were a cloud. The cloud wishes it were a bird.
Unknown
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न भाषा न पांडित्य

न भाषा न पांडित्य

न चित्ता तायए भासा
कुओ विज्जाणुसासणं

विचित्र (लच्छेदार) भाषाएँ भी (दुराचारी की दुर्गति से) रक्षा नहीं कर सकतीं, फिर विद्यानुशासन (पाण्डित्य) की तो बात ही क्या?

भाषाज्ञान और विद्यानुशासन में बहुत अन्तर है| एक आदमी एक ही भाषा जानता हो; फिर भी वह विद्यानुशासित अर्थात् पण्डित हो सकता है; परन्तु कोई अन्य आदमी अनेक भाषाओं का ज्ञाता होकर भी मूर्ख हो सकता है| भाषाओं की जानकारी से ज्ञान नहीं बढ़ता| Continue reading “न भाषा न पांडित्य” »

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