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परमात्मा का उपकार न भूलो

परमात्मा का उपकार न भूलो

निर्मुक्तसफनिकरं परमात्मतत्त्वम्
तु जो सुख सुविधा भोगते हो वह इन परमात्मा की कृपा का ही फल समझना| परमात्मा ने हमें पुण्य का मार्ग बताया उससे हमने शुभ कर्म कर पुण्य का उपार्जन किया| शुभ कर्म के उदय से उत्तम मानव-जन्म, उत्तम कुल, पांच इन्द्रियां, विचारक मन, माता-पिता, घर, पैसा, आरोग्य, वस्त्र, भोजन के अतिरिक्त तारक देव-गुरु का योग आदि मिले| Continue reading “परमात्मा का उपकार न भूलो” »

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Motivational Wallpaper #16

परमात्मा से जितना हम अपना सम्बन्ध जोडेंगे, उतनी ही शक्ति हमें प्राप्त होगी, क्योंकि शक्ति वहीं से आती है

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Motivational Wallpaper #13

समय का दुरुपयोग असार जीवन है
समय का सदुपयोग सार जीवन है
राग असार है, वीतराग ही सार है
बंधन असार, मुक्ति ही सार है

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Motivational Wallpaper #15

अज्ञान के अतिरिक्त कोई अन्धकार है ही नहीं

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अनुभव ! तुं है हितु हमारो

Listen to अनुभव ! तुं है हितु हमारो

अनुभव ! तुं है हितु हमारो,
आय उपाय करो चतुराई, और को संग निवारो,
अनुभव ! तुं है हितु हमारो

…१

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Quote #20

जितना ऊपर उठना हो, उतने ऊँचे विचार चाहिये |
शून्य पालनपूरी
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Helping others is the true celebration

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अनन्यदर्शी बनें

अनन्यदर्शी बनें

जो अणण्णदंसी से अणण्णारामे

जो अनन्यदर्शी होता है, वह अनन्याराम होता है और जो अनन्याराम होता है, वह अनन्यदर्शी होता है

‘स्व’ या आत्मा के अतिरिक्त जो अन्यत्र अपनी दृष्टि नहीं रखता, वह अनन्यदृष्टि है| ऐसा व्यक्ति अन्यत्र रमण न करने से ‘अनन्याराम’ कहलाता है| Continue reading “अनन्यदर्शी बनें” »

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साधु-संतों का विनय करो

साधु संतों का विनय करो

नमो लोए सव्वसाहूणं
साधु-संतों को देखते ही हाथ जोड़कर नमस्कार करो| उनकी त्याग वैराग्यमयी पवित्र वाणी सुनो| Continue reading “साधु-संतों का विनय करो” »

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एकज्ञ-सर्वज्ञ

एकज्ञ सर्वज्ञ

जे एगं जाणइ से सव्वं जाणइ|
जे सव्वं जाणइ से एगं जाणइ||

जो एक को जानता है, वह सबको जानता है और जो सबको जानता है, वह एक को जानता है

जिसे एक (आत्मा) का ज्ञान है, उसे सब (अनात्म पदार्थों) का ज्ञान है और जिसे सब (अजीव तत्त्वों) का ज्ञान है, उसे एक (आत्मतत्त्व) का ज्ञान है|

जिसे आत्मस्वरूप का सम्यग्ज्ञान हो जाता है, वह अनात्मतत्त्वों में रमण नहीं करता; क्यों कि वह आत्मभि पदार्थों के स्वरूप को – उनकी क्षणिकताको भी जान लेता है| Continue reading “एकज्ञ-सर्वज्ञ” »

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