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न तृप्ति, न तृष्टि

न तृप्ति, न तृष्टि

देवावि सइंदगा न तित्तिं न तुट्ठिं उवलभन्ति

इन्द्रों सहित देव भी (विषयों से) न कभी तृप्त होते हैं, न सन्तुष्ट

पॉंच इन्द्रियॉं हैं और उनके अलग-अलग विषय हैं| जीवनभर जीव विषय-सामग्री को जुटाने के लिए दौड़-धूप करता रहता है| एक इन्द्रिय के विषय जुटाने पर दूसरी इन्द्रिय के और दूसरी के बाद तीसरी, चौथी और पॉंचवी इन्द्रिय के विषय क्रमशः जुटाने पड़ते हैं| Continue reading “न तृप्ति, न तृष्टि” »

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चहक एक चिड़िया की

चहक एक चिड़िया की
एक पेड़ पर चिड़िया अपनी मस्ती में चहक रही थी| उस पेड़ के नीचे एक भक्त विश्राम कर रहा था| चिड़िया की चहक सुनकर भक्त बोला, ‘‘अहा ! चिड़िया भी भगवान को याद कर रही है|’’ Continue reading “चहक एक चिड़िया की” »

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आलोचना शुद्धि – साल का ग्यारहवां कर्तव्य

आलोचना शुद्धि   साल का ग्यारहवां कर्तव्य
यह कर्तव्य अत्यंत महत्वपूर्ण है| अहंकार के कारण जीवको कभी भी अपनी गलती नहीं दिखाई देती|

धमाका हुआ| तब भतीजेने पूछा, ‘‘चाचा ! क्या हुआ ?’’ चाचाने कहा, ‘‘कुछ नहीं बेटा… वह तो मेरी धोती, कफनी और टोपी गिर गई|’’ भतीजेने पुनः प्रश्न किया, ‘‘किन्तु इसमें इतनी आवाज़ ?’’ चाचाने कहा, ‘‘तू समझता नहीं है, उसमें मैं भी था !’’ बात यह है कि चाचा कहने के लिए तैयार नही है कि, ‘‘मैं गिर गया’’| Continue reading “आलोचना शुद्धि – साल का ग्यारहवां कर्तव्य” »

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दुःख और तृष्णा

दुःख और तृष्णा

दुक्खं हयं जस्स न होइ मोहो,
मोहो हओ जस्स न होइ तण्हा

जिसमें मोह नहीं होता, उसका दुःख नष्ट हो जाता है और जिसमें तृष्णा नहीं होती उसका मोह नष्ट हो जाता है

तृष्णा बड़े-बड़े धैर्यशालियों के भी छक्के छुड़ा देती है – आँख वालों को भी अन्धा बना देती है, अन्धेरी रात में आँखवालों को जिस प्रकार पास में पड़ी हुई वस्तु भी दिखाई नहीं देती, उसी प्रकार तृष्णाग्रस्त व्यक्ति को अपने पास रही हुई सम्पत्ति भी दिखाई नहीं देती और वह अधिक से अधिक सम्पत्ति पाने की कोशिश में लगा रहता है – जीवन भर घानी के बैल की तरह परिश्रम करता रहता है| Continue reading “दुःख और तृष्णा” »

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प्रमाद छोड़िये

प्रमाद छोड़िये

अलं कुसलस्स पमाएणं

कुशल व्यक्ति को प्रमाद नहीं करना चाहिये

मूर्ख व्यक्ति तो प्रमाद करते ही हैं; परन्तु जो व्यक्ति मूर्ख नहीं हैं-कुशल हैं – बुद्धि के स्वामी हैं – समझदार हैं, उनसे तो यह आशा नहीं की जा सकती कि वे प्रमादी बनकर अपना जीवन व्यर्थ खो दें| Continue reading “प्रमाद छोड़िये” »

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पर्युषण महापर्व

पर्युषण महापर्व

पर्वाणि सन्ति प्रोक्तानि बहूनि श्री जिनागमे|
पर्युषणासमं नान्यत् कर्मणां मर्मभेदकृत्॥

जय हो अनंत उपकारी वीतराग सर्वज्ञ अरिहंत परमात्मा की, जिन्होंने पर्वो में श्रेष्ठ ऐसे पर्युषण महापर्व का प्रकाश दिया| यह प्रकाश मनुष्य-जन्म में जैन को ही सरलतापूर्वक प्राप्त होता है, इसलिए मानवभवमें तो धर्मकी विशेष आराधना करनी चाहिए|

तीन युवक परदेश जाकर आये| एयरपोर्ट पर ही अग्रगण ओफिसरने तीन में से प्रथम महाराष्ट्रियन युवक को पूछा- ‘‘आप परदेश में क्या करके आये ?’’ उसने जवाब दिया- ‘‘मैं परदेशमें च.इ.अ. पास करके आया|’’ बादमें दूसरे बंगाली युवक को पूछा- ‘‘आप विदेश में क्या करके आये ?’’ उसने जवाब दिया- ‘‘मैं डोक्टरी पास करके आया|’’ बादमें तीसरे सरदारजी को पूछा – ‘‘आप विदेश में क्या करके आये?’’ सरदारजीने कहा – ‘‘मैं अमरिका में टाइम पास करके आया|’’ Continue reading “पर्युषण महापर्व” »

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अइमुत्ता मुनि

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अरज सुनो प्रभु अनंत जिणंदा

Listen to अरज सुनो प्रभु अनंत जिणंदा

श्री अनंतनाथ जिन स्तवन
राग : कल्याणअरज सुनो प्रभु अनंत जिणंदा
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Exposition of the Carvaka system (Materialist)

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