परिवार के सदस्यों से इतना प्रेम कीजिये कि आपके घर में हर रोज उत्सव हो
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निरर्थक शिक्षा छोड़कर सार्थक शिक्षा ही ग्रहण करें
राग-द्वेष के क्षय से जीव एकान्तसुखस्वरूप मोक्ष को प्राप्त करता है
श्री श्रेयांश्नाथ जिन स्तवन
राग : परमातम पूरण कला…
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सद्गुण-साधना का कार्य भुजाओं से समुद्र तैरने के समान है
मनोज्ञ शब्दादि राग के और अमनोज्ञ द्वेष के कारण कहे गये हैं
कोमल प्रशंसात्मक शब्द हमें अच्छे लगते हैं और कठोर निन्दात्मक शब्द बुरे| Continue reading “राग द्वेष के कारण” »
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