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आत्महित का अवसर

आत्महित का अवसर

अत्तहियं खु दुहेण लब्भइ

आत्महित का अवसर मुश्किल से मिलता है

इस संसार में पत्थर बहुत हैं, हीरे कम-कुत्ते बहुत हैं, हाथी कम-सियार बहुत हैं, सिंह कम – नीम के पेड़ बहुत हैं, आम के कम – कङ्कर बहुत हैं, मोती कम – दुर्जन बहुत हैं, सज्जन कम| Continue reading “आत्महित का अवसर” »

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श्री देवर्धिगनी क्षमाश्रमण

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दुरुक्त कैसा होता है ?

दुरुक्त कैसा होता है ?

वाया दुरुत्ताणि दुरुद्धराणि,
वेराणुबंधीणि महब्भयाणि

वाणी से बोले हुए दुष्ट और कठोर वचन जन्मजन्मान्तर के वैर और भय के कारण बन जाते हैं

सूक्त का विलोम शब्द दुरुक्त है| सूक्त अच्छा वचन है – जीवनशुद्धि का प्रेरक है तो दुरुक्त बुरा वचन है – हार्दिक क्षोभ का प्रेरक है – कलह कारक है| Continue reading “दुरुक्त कैसा होता है ?” »

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विरक्त साधक

विरक्त साधक

विरता हु न लग्गंति,
जहा से सुक्कगोलए

मिट्टी के सूखे गोले के समान विरक्त साधक कहीं भी चिपकता नहीं है

मिट्टी का गीला गोला यदि दीवार पर फैंका जाये; तो वह दीवार से चिपक जायेगा; क्यों कि जल से मिट्टी में चिपकने का गुण पैदा हो जाता है| Continue reading “विरक्त साधक” »

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धर्माचार्य को वन्दन

धर्माचार्य को वन्दन

जत्थेव धम्मायरियं पासेज्जा,
तत्थेव वंदिज्जा नमंसिज्जा

जहॉं कहीं भी धर्माचार्य दिखाई दें, वहीं उन्हे वन्दना नमस्कार करना चाहिये

आचारकी प्रेरणा देने वाले आचार्य हैं और यह प्रेरणा जिन्हें प्राप्त होती है, उनके द्वारा वे प्रणम्य हैं| Continue reading “धर्माचार्य को वन्दन” »

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अनुभव से सच्चाई खोजो

अनुभव से सच्चाई खोजो

अप्पणा सच्चमेसेज्जा

स्वयं सत्यान्वेषण करना चाहिये

कहावत है – ‘‘मुण्डे मुण्डे मतिर्भिना’’ अर्थात् प्रत्येक व्यक्ति की बुद्धि अलग-अलग होती है, इसलिए प्रत्येक के विचार भी अलग-अलग होते हैं| Continue reading “अनुभव से सच्चाई खोजो” »

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श्रुतधर्म एवं चारित्रधर्म

श्रुतधर्म एवं चारित्रधर्म

दुविहे धम्मे-सुयधम्मे चेव चरित्तधम्मे चेव

धर्म के दो रूप हैं – श्रुतधर्म (तत्त्वज्ञान) और चारित्रधर्म (नैतिकता)

जब कोई मॉं यह चिल्लाती है – शिकायत करती है कि बेटा मेरी सुनता ही नहीं है तो क्या वह बेटे के बहरेपन का रोना रोती है? क्या उस पुत्र के कान नहीं है? क्या उसके कानों में सुनने की शक्ति नहीं है? Continue reading “श्रुतधर्म एवं चारित्रधर्म” »

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The Lord’s life as a Chadmastha

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Wallpaper #10

Desires are infinite like the sky

Standard Screen Widescreen Mobile
1024×768 1440×900 960×640
1600×1200 1920×1080

 

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