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आप स्वयं अपने मित्र है|


पुरिसा ! तुममेव तुमं मित्तं,
किं बहिया मित्तमिच्छसि

हे पुरुष ! तू स्वयं ही अपना मित्र है| अन्य बाहर के मित्रों की चाह क्यों रखता है ?

कहते हैं, ईश्‍वर भी उसीकी सहायता करता है, जो अपनी सहायता खुद करता है| इसका आशय यही है कि दूसरों की सहायता की आशा न रखते हुए हमें स्वयं ही अपने कर्त्तव्य का पालन करते रहना चाहिये| Continue reading “आप स्वयं अपने मित्र है|” »

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क्रोध – एक अग्नि

क्रोध   एक अग्नि
एकबार आये हुए क्रोध में कितने सालों के तप और संयम को भस्मीभूत करने की ताकात है ? यदि कोई ऐसा प्रश्न करें, तो जवाब यह है कि- तप और संयम का उत्कृष्ट काल है देशोन पूर्व क्रोड वर्ष| इतने दीर्घ कालमें तप और संयम की जो साधना कर सकते हैं, उस साधना को भस्मीभूत करने की ताकत एकबार के आये हुए क्रोध में है| Continue reading “क्रोध – एक अग्नि” »

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जीव विचार – गाथा 1

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दूसरा और तीसरा अवतार

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मनुष्यभव

मनुष्यभव

जीवा सोहिमणुप्पत्ता, आययन्ति मणुस्सयं

सांसारिक जीव क्रमशः शुद्ध होते हुए मनुष्यभव पाते हैं

जीव शुभाशुभ कर्मों के फलस्वरूप विभिन्न योनियों में जन्म लेते हैं| ऐसी योनियों की संख्या शास्त्रों में चौरासी लाख बताई गयी है| मनुष्य योनि सर्वश्रेष्ठ मानी गई है; क्योंकि यहीं से सिद्धपद की प्राप्ति हो सकती है – मोक्ष की साधना हो सकती है| Continue reading “मनुष्यभव” »

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घेटीपाग की यात्रा

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रात्रिभोजन न करने के वैज्ञानिक कारण


रात में भोजन, पानी आदि ग्रहण करना जैन धर्म में निषेध हैं| इस निषेध के कई कारण हैं| कीटाणु और रोगाणु जिनको नग्न आंखों से देखना असंभव हैं, वे सूरज की रौशनी में गायब हो जाते हैं, वास्तव में नष्ट नहीं होते; वे छायादार स्थानों में शरण लेते हैं और सूर्यास्त के बाद; वे वातावरण में प्रवेश कर उसे व्याप्त करते हैं और फिर हमारे भोजन में मिल जाते हैं| इस तरह का भोजन उपभोग करने से कीटाणुओं और जीवाणुओ की हत्या होती हैं और बारी में हमारे बीमार स्वास्थ्य का कारण बनते हैं|
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Motivational Wallpaper #14

A friend is one of the nicest things you can have & one of the best things you can be

Standard Screen Widescreen Mobile
800×600 1280×720 iPhone
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फफूंदी/फूलन को पहचानो

फफूंदी/फूलन को पहचानो
बासी खाद्य पदार्थ आदि पर सफेद रंग की फुग दिखाई देती है| यह खास करके बारिश में विशेष होती है| मिठाई, खाखरा, पापड, वडी, अन्य खाद्य पदार्थ, दवाई की गोलियॉं, साबुन पर, चमड़े के पाकिट-पट्टे पर, पुस्तक के पुठ्ठे पर तथा अन्य वस्तु पर नमी के कारण रातोरात सफेद फुग जम जाती है| Continue reading “फफूंदी/फूलन को पहचानो” »

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सद्गुरु की शरण

सद्गुरु की शरण

सद्गुरुः शरणं मम
यह संसार जन्म, मरण, रोग, शोक, व्याधि और उपाधि के कारण महा दुःखमय है| ऐसे दुःखमय संसार में सार तो कुछ भी नहीं है और सुख भी कहीं नहीं है…| Continue reading “सद्गुरु की शरण” »

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