लाइफ स्टाइलहिंसा न करें
नाइवाएज्ज कंचणं
सबको जीवन प्रिय है, किसीके प्राणों का अतिपात नहीं चाहिये
शिक्षा का प्रारम्भ
सिंह-सी निर्भयता
सिंह के समान निर्भीक; केवल शब्दों से न डरिये
यथावादी तथाकारी
जहावाई तहाकारी या वि भवइ
करणसत्य में रहनेवाला जीव जैसा बोलता है, वैसा ही करता है
सम्मान की इच्छा मत करो
करनी ऐसी कीजिए जिसे न जाने कोय|
जैसे मेहंदी पात में बैठी रंग छुपाय॥
काम करना आपका काम है…..बस सिर्फ काम करें…..नाम नहीं चाहें…..धर्म करना आपकी आत्मा का स्वभाव है, तो सम्मान की इच्छा मत करो|
मत बन विषय विलासी रे मनवा
राग : कित गुण भयो है उदासी बिहाग
भाव : विषय विलास = आत्म विनाश एना त्यागनी पावन प्रेरणा
मत बन विषय विलासी रे मनवा,
ए जबरी जग फांसी. रे मनवा.
हतस्त हरिण मच्छ भ्रमर पतंग,
एक एक विषयना आशी.
मुरझाये फूल जिन्होंने आलोचना नहीं ली

रज्जा साध्वी ने सचित्त पानी पीया
रज्जा साध्वीजी को कोढ़ रोग हो गया था| एक साध्वीजी ने उससे पूछा कि यह रोग आपको कैसे हुआ? तब उसने कहा कि अचित्त (उबाला हुआ) पानी पीने से गर्मी के कारण यह रोग हुआ है| Continue reading “मुरझाये फूल जिन्होंने आलोचना नहीं ली” »
जनक सुता हुं नाम
भाव : महासती सीतानो रावणने पडकार ने शील दृढता
जनक सुता हुं नाम धरावुं,
राम छे अंतर जामी;
पालव मारो मेलोने पापी,
कुळने लागे छे खामी.
अडशो मांजो, मांजो मांजो मांजो मांजो अडशो,
म्हारो नावलीयो दुहवाय,
मने संग केनो न सुहाय;
म्हारुं मन मांहेथी अकळाय.

















