(राग : ओली चंदनबाळाने बारणे)
भाव : चंदनबाळा नी प्रभुवीर प्रत्येनी शुभ भावना
बतारा मुखडा उपर जाउं वारी रे,
वीर मारां मन मान्या, तारा दर्शननी बलिहारी रे वीर,
मुठी बाकुळा माटे आव्या रे; मने हेत धरी बोलाव्या रे.
(राग : ओली चंदनबाळाने बारणे)
भाव : चंदनबाळा नी प्रभुवीर प्रत्येनी शुभ भावना
बतारा मुखडा उपर जाउं वारी रे,
वीर मारां मन मान्या, तारा दर्शननी बलिहारी रे वीर,
मुठी बाकुळा माटे आव्या रे; मने हेत धरी बोलाव्या रे.
आयु बीत रही है और युवावस्था भी
“कर्तव्य पहला – अमारि प्रवर्तन”
धर्मका मूल दया है -
जब दया जीवनकर्तव्य है, तब पर्युषण का तो महाकर्तव्य बनता ही है| इसे प्रथम नंबर का कर्तव्य समझना, क्योंकि दयासे अपना हृदय मृदु-कोमल बनता है और कोमल हृदयमें दूसरे सभी धर्म अच्छी तरह से बास कर सकते हैं| भूमि को जोतकर मुलायम बनायी हो, तो ही उसमें बीज को बोया जा सकता है| इसलिए यहॉं पर्युषणमें दया-अमारि प्रवर्तन का पहला कर्तव्य पालन करके हृदयको कोमल-मुलायम सा बनाना है, जिससे उसमें साधर्मिक भक्ति, क्षमापना, त्याग, तपश्चर्यादि धर्मो को बोया जा सके| Continue reading “पर्युषण महापर्व – कर्तव्य पहला” »

मिट्टी, पत्थर, खनिज, धातुयें, रत्न इ. पृथ्वीकाय के शरीर हैं| गम- नागमन से, वाहन-व्यवहार से, अन्य शस्त्र संस्कार इत्यादि से पृथ्वीकाय अचित्त बनते हैं| जीवन व्यवहार में निरर्थक सचित्त पृथ्वीकाय की विराधना (हिंसा) न हो जाये उसकी सावधानी रखनी चाहिए| Continue reading “पृथ्वीकाय की जयणा” »
आन्तरिक विकारों से ही युद्ध कर, बाह्य युद्ध से तुझे क्या लाभ?
वीर्य को छिपाना नहीं चाहिये
जो बुद्धिमान हैं, उन्हें अपनी बुद्धि का उपयोग दूसरों के झगड़े मिटाने में करना चाहिये| Continue reading “वीर्यको न छिपायें” »
हाथी और कुन्थु में समान ही जीव होता है