There are no shortcuts to any place worth going.Beverly Sills
मायामृषावाद
सादियं न मुसं बूया
मन में कपट रखकर झूठ नहीं बोलना चाहिये
साधुओं की प्रसन्नता
महप्पसाया इसिणो हवंति
ऋषि सदा प्रसन्न रहते हैं
सम्राट प्रजापल के प्रश्न

प्रश्न – बिना आग के कौन जलाती है ?
उत्तर – ईर्ष्या, तृष्णा, चिन्ता, कर्जदारी, नव-जवान कुंआरी लड़की, विधवा बहु-बेटी| Continue reading “सम्राट प्रजापल के प्रश्न” »
तप से पूजा की कामना न करें
नो पूयणं तवसा आवहेज्जा
तप के द्वारा पूजा (प्रतिष्ठा) की अभिलाषा नहीं करनी चाहिये
अपराजेय शत्रु
एगप्पा अजिए सत्तू
एक असंयत आत्मा ही अजित शत्रु है
जिसे हम अपना शत्रु समझते हैं| Continue reading “अपराजेय शत्रु” »
जीव और शरीर
ओ जीवो अं सरीरं
जीव अन्य है, शरीर अन्य
सप्तम जिनवर सेवीए
श्री सुपार्श्वनाथ जिन स्तवन
राग : दिलरंजन जीनराजजी…(ये जींदगी उसीकी है)
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पाप न करें, न करायें
पावकम्मं नेव कुज्जा न कारवेज्जा
पापकर्म न स्वयं करना चाहिये और न दूसरों से कराना चाहिये
मूर्ख की संगति न करें
अलं बालस्स संगेणं
बाल (अज्ञानी या मूर्ख) की संगति नहीं करनी चाहिये


















