सत्य ही भगवान है
भगवान सत्य
तं सच्चं भगवं
भगवान, ईश्वर, गॉड, अल्लाह, खुदा आदि परमात्मा के विभिन्न नाम हैं| जगत में परमात्मा ही सर्वोच्च सत्ता पर प्रतिष्ठित है; परन्तु वह परमात्मा कैसा है ? उसका स्वरूप क्या है ? इस विषय में विभिन्न दार्शनिकों के विभिन्न मत हैं| Continue reading “भगवान सत्य” »
बंभसारे वनमां भमतां
राग : नवो वेष रचे
भाव : जीवननी अनाथता नो परिचय ने श्रेणीक ने अनाथी मुनिनो सद्बोध
बंभसारे वनमां भमतां,
ऋषी दीठो रयवाडी रमतां;
रुप देखीने मने रीझयो,
भारे करमी पण भदज्यो.
…१
अदीनभाव से रहो
अदीणमणसो चरे
कलावती की कलाईयों का छेदन किया गया

कलावती रानी पूर्वभवमें तोते के दोनों पंख को काटकर खुश हई थी, उसकी आलोचना नहीं ली| उसके बाद क्रम से तोते का जीव राजा बना, उसकी रानी कलावती बनी| एक दिन अचानक रानी के हाथ में कंकण (हाथ के आभूषण) पहने हुए देखकर दासीने पूछा कि, ‘‘ये कहॉं से आये?’’ रानी ने जवाब दिया, ‘‘जो हमेशा मेरे मनमें रहता है और जिसके मन में सदा मैं रहती हूं, रात-दिन जिसे मैं भूला नहीं पाती, जिसको देखने से मेरे हर्ष का कोई पार नहीं होता, उसने ये भेजे हैं|’’ Continue reading “कलावती की कलाईयों का छेदन किया गया” »
सच्चा साधक
हमेशा दूसरों की अच्छाइयॉं देखो
परमात्मा का उपकार न भूलो
निर्मुक्तसफनिकरं परमात्मतत्त्वम्















