श्री महावीर जिन स्तवन
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वीर जिनेश्वर चरणे लागुं
Water is precious
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सम्बन्धों को संभाले
चित्रक और संभूति चंडाल बने

जंगल से एक मुनि गुज़र रहे थे| रास्ता भूल जाने के कारण दोपहर के समय बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े| गाय चराने के लिए आये हुये चार ग्वालों ने इस दृश्य को दूर से देखा| वे नज़दीक आये| मुनि बेहोश थे| होठ सूख गए थे| चेहरा कुम्हला गया था| तृषा का अनुमान कर उन्होंने गाय को दुहकर मुँह में दूध डाला| इससे मुनि होश में आये| कुछ समय के बाद मुनिश्री ने चारों को समझाने का प्रयास करते हुए कहा कि संसाररूपी जंगल में उनकी आत्मा भटक रही हैं| उस दुःख से पार उतरने के लिये एकमात्र साधन है चारित्र धर्म| इस प्रकार का बोध दिया| चारों ने प्रतिबोध पाकर चारित्र ग्रहण किया| उनमें से दो आत्माएं तो उसी भव में केवलज्ञान प्राप्त कर मोक्ष में चली गई| Continue reading “चित्रक और संभूति चंडाल बने” »
दुलह नारी तुं बडी बावरी
दुलह नारी तुं बडी बावरी
पिया जागे तुं सोवे
पिया चतुर हम निपट अग्यानी
न जानु क्या होवे?
न जानु क्या होवे?
Stop exploitation of all kind
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प्रायश्चित देने वाले गुरु कौन होते हैं?

आलोचना का प्रायश्चित देने वाले गुरु पांच व्यवहारों के जानकार होते हैं|
आगम व्यवहारी :- अर्थात् केवलज्ञानी, मनःपर्यवज्ञानी, अवधिज्ञानी, १४, १०, ९ पूर्वी हो, उनके पास प्रायश्चित लेना चाहिए| Continue reading “प्रायश्चित देने वाले गुरु कौन होते हैं?” »
दुर्लभ श्रद्धा
श्रद्धा अत्यन्त दुर्लभ है
एक ही गाथा से
एक कण से द्रोण-भर पाक की और एक गाथा से कवि की परीक्षा हो जाती है














