लोभ का प्रसंग आने पर लोभी झूठ बोलने लगता है
झूठ बोलने लगता है
लोभपत्ते लोभी समावइज्जा मोसं वयणाए
झूठ बोलने के अनेक कारण हैं – क्रोध, मान, माया आदि; परन्तु लोभ सबसे बड़ा कारण है| जो लोभी व्यक्ति है, वह साधारण – से लाभ के लिए भी बात-बात पर झूठ बोलने को तैयार हो जाता है| Continue reading “झूठ बोलने लगता है” »
सादि सान्त
सरीरं सादियं सनिधणं
शरीर सादि है और सान्त भी
1) अनादि अनन्त
2) अनादि सान्त
3) सादि अनन्त
4) सादि सान्त
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Story of Sagarcandra, Priyadarsana and Asokadatta
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मुखरता से बचें
मोहरिए सच्चवयणस्स पलिमत्थू
मुखरता सत्यवचन का विघाता करती है
जान कर बोलें
जमट्ठं तु न जाणेज्जा, एवमेयंति नो वए
जिसके विषय में पूरी जानकारी न हो, उसके विषय में ‘‘यह ऐसा ही है’’ ऐसी बात न कहें
इच्छानिरोध
छंदं निरोहेण उवेइ मोक्खं
इच्छाओं को रोकने से ही मोक्ष प्राप्त होता है
सांभळजो तुमे अद्भुत वातो
भाव : ३ वर्षना बालमुनि वज्रस्वामी ने एमना जीवन नी अद्भुत कहानी
सांभळजो तुमे अद्भुत वातो,
वयर कुंवर मुनिवरनी रे;
षट् महिनाना गुरु झोळीमां,
आवे केलि करंता रे,
त्रण वरसना साधवी मुखथी,
अंग अगीयार भणंता रे.
…सां.१
















