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साहस – जीवन का मूल गुण

साहस   जीवन का मूल गुण
जीवन एक युद्ध है, और उसमें विजयी बनने के लिए साहस एक अमोघ अस्त्र है| दुर्बल और भीरु मानव कभी भी प्रगति के द्वार नहीं छू सकता| जीवन की उन्नति, प्रगति और उच्चतम विकास के लिए साहस मूल आधार है| Continue reading “साहस – जीवन का मूल गुण” »

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महाबाल के रूप में चौथा अवतार

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जीवन क्षणभंगुर है

जीवन क्षणभंगुर है

असंखयं जीवियं मा पमायए
इस जगत में सब क्षणभंगुर है; अगर प्यार खोजना हो तो शाश्‍वत में खोजो| यहां कुछ अपना नहीं है| यहां भरमो मत, अपने को भरमाओ मत, भरमाओ मत ! यहां सब छूट जानेवाला है| यहां मृत्यु ही मृत्यु फैली है| यह मरघट है| यहां बसने के इरादे मत करो| यहां कोई कभी बसा नहीं| Continue reading “जीवन क्षणभंगुर है” »

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न अपनी आशातना करो न दूसरों की

न अपनी आशातना करो न दूसरों की

नो अत्ताणं आसाएज्जा, नो परं आसाएज्जा

न अपनी आशातना करो, न दूसरों की

जो लोग हीन-मनोवृत्ति के शिकार होते हैं – अपने को तुच्छतम समझते हैं, वे इस दुनिया में उन्नति नहीं कर सकते | उनमें अपना विकास करने का – प्रगतिपथ पर आगे बढ़ने का साहस तक नहीं हो सकता – जीवनभर वे अपने को अक्षम ही समझते रहते हैं और अक्षम ही बने रहते हैं| Continue reading “न अपनी आशातना करो न दूसरों की” »

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Refutation of the Carvaka System

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सूक्ष्म शल्य

सूक्ष्म शल्य

सुहुमे सल्ले दुरुद्धरे

सूक्ष्म शल्य बड़ी कठिनाई से निकाला जा सकता है

जो लोग पैदल चलते हैं, उन्हें मार्ग में कॉंटे चुभ जायें तो वे क्या करते हैं? दूसरे कॉंटे से अथवा सूई से निकाल लेते हैं| यद्यपि कॉंटा निकल जाने पर भी वेदना बनी रहती है, फिर भी कुछ समय बाद मिट जाती है और कुछ दिन बाद तो उसका छेद भी गायब हो जाता है| चमड़ीसे चमड़ी मिल जाती है| Continue reading “सूक्ष्म शल्य” »

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बुरी संगत

बुरी संगत
पवन के पिता जी बड़े परेशान थे| कुछ दिनों से पवन बुरी संगत में पड़ गया था| अंत में उन्हें एक युक्ति सूझी| वे बाजार से कुछ आम खरीद कर लाए| सब आम तो पके हुए और बढ़िया थे, पर एक आम काफी सड़ा हुआ था| Continue reading “बुरी संगत” »

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श्री अजितनाथजी की चरण पादुकाएँ

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अतिवेल न बोलें

अतिवेल न बोलें

नाइवेलं वएज्जा

अधिक समय तक एवं अमर्याद न बोलें

‘वेला’ का अर्थ समय भी होता है और मर्यादा भी; इसलिए इस सूक्ति के दो अर्थ होते हैं| Continue reading “अतिवेल न बोलें” »

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श्री सीमंधर स्वामी, मुक्तिना गामी

Listen to श्री सीमंधर स्वामी, मुक्तिना गामी

श्री सीमंधर स्वामी जिन स्तवन
राग : माढ.., नेमि जिन प्यारा…

श्री सीमंधर स्वामी, मुक्तिना गामी, दीठे परमानंद,
प्रभु सुमति आपो, कुमति कापो, टाळो भवभयङ्गंद,
कर्म अरिगण दूर करीने,
तोडो भवतरू कंद रे.

…सीमंधर.१

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