मुनि कभी मर्यादा से अधिक न हँसे
अधिक न हँसे
अतिवेलं न हसे मुणी
हँसना और सदा हँसमुख रहना स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है | जो व्यक्ति उदास बन कर दिनभर मुँह फुलाये हुए बैठा रहता है – सबको अपना दुःखड़ा सुनाता रहता है – दूसरों के साथ मारपीट और बकझक करता रहता है, ऐसा चिड़चिड़ा आदमी क्या कभी स्वस्थ रह सकता है ? कभी नहीं| Continue reading “अधिक न हँसे” »
सिद्धगिरिराज की भावयात्रा – चलो सिद्धगिरि चलें…!
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अनन्तसुख का नाश मत कीजिये
माएयं अवमन्जंता, अप्पेणं लुंपहा बहुं
सन्मार्ग का तिरस्कार करके अल्प सुख (विषयसुख) के लिए अनन्त सुख (मोक्षसुख) का विनाश मत कीजिये
क्रिया में रुचि
किरियं च रोयए धीरो
धीर पुरुष क्रिया में रुचिवाला होता है
अभोगी नहीं भटकता
भोगी भमइ संसारे, अभोगी विप्पमुच्चइ|
भोगी संसार में भटकता है और अभोगी मुक्त हो जाता है
Motivational Wallpaper #19
बीच में कहॉं ?
जस्स नत्थि पुरा पच्छा
मज्झे तस्स कुओ सिया ?
मज्झे तस्स कुओ सिया ?
जिसके आगे-पीछे न हो, उसके बीच में भी कैसे होगा?
विनय में स्थिर करें
विणए ठविज्ज अप्पाणं, इच्छंतो हियमप्पणो
आत्महितैषी साधक अपने को विनय में स्थिर करे















