थोवं लद्धुं न खिंसए
थोड़ा मिलने पर झुँझलाएँ नहीं
थोड़ा मिलने पर झुँझलाएँ नहीं
सम्यग्दर्शी पाप नहीं करता
साधक को कोई यदि दुर्वचन कहे; तो भी वह उस पर क्रोध न करे
जिस विषय में अपने को शंका हो, उस विषय में ‘‘यह ऐसी ही है’’ ऐसी भाषा न बोलें
बुद्धि ही धर्म का निर्णय कर सकती है
जो अभ्यन्तर को जानता है, वह बाह्य को जानता है और जो बाह्य को जानता है वह अभ्यन्तर को जानता है
मान को नम्रता या मृदुता से जीतें
सदाचार-प्रवृत्त आत्मा मित्र है और दुराचारप्रवृत शत्रु
तू, तुम जैसे अमनोहर शब्द कभी नहीं बोलें
कामभोगों में आसक्त रहनेवाले व्यक्ति कर्मों का बन्धन करते हैं