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Motivational Wallpaper #34

अपराधियों और अपना अहित करनेवालों का भी बुरा मत सोचो

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Motivational Wallpaper #52

जैसा करोगे वैसा भरोगे इसमें भाग्य या भगवान का क्या दोष है?
कर्मानुसार फल मिलता है

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Description of Vinita

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भले की हो भावना

भले की हो भावना

शिवमस्तु सर्वजगतः
बहुत से याचक भीख मॉंगते वक्त बोलते हैं – दे उसका भी भला और न दे उसका भी भला! Continue reading “भले की हो भावना” »

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झूठ बोलने लगता है

झूठ बोलने लगता है

लोभपत्ते लोभी समावइज्जा मोसं वयणाए

लोभ का प्रसंग आने पर लोभी झूठ बोलने लगता है

झूठ बोलने के अनेक कारण हैं – क्रोध, मान, माया आदि; परन्तु लोभ सबसे बड़ा कारण है| जो लोभी व्यक्ति है, वह साधारण – से लाभ के लिए भी बात-बात पर झूठ बोलने को तैयार हो जाता है| Continue reading “झूठ बोलने लगता है” »

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सादि सान्त

सादि सान्त

सरीरं सादियं सनिधणं

शरीर सादि है और सान्त भी

इस जगत् के समस्त पदार्थ इन चार विभागों में विभाजित किये जा सकते हैं :-
1) अनादि अनन्त
2) अनादि सान्त
3) सादि अनन्त
4) सादि सान्त
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लोभ और चंचलता

लोभ और चंचलता

लद्धो लोलो भणेज्ज अलियं

लोभी और चञ्चल व्यक्ति झूठ बोला करता है

जो वस्तु जैसी है, उसे वैसी न कहना अयथार्थ वचन है – झूठी बात है| झूठ कौन बोलता है ? इस प्रश्‍न का उत्तर देते हुए कहा गया है कि जो व्यक्ति लोभी होता है, वह अपनी तृष्णा तो तृप्त करने के लिए झूठ बोलता है| तृष्णा कभी तृप्त नहीं होती – यह एक वास्तविकता है; परन्तु लोभी इस वास्तविकता से अनभिज्ञ बना रह कर जीवनभर तृष्णा-तृप्ति का प्रयास करता ही रहता है| इस प्रयास में उसे कभी सफलता नहीं मिलती; फिर भी वह निरन्तर इसके लिए दौड़धूप करता ही रहता है और कदम कदम पर झूठ बोलने को तैयार रहता है| Continue reading “लोभ और चंचलता” »

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जान कर बोलें

जान कर बोलें

जमट्ठं तु न जाणेज्जा, एवमेयंति नो वए

जिसके विषय में पूरी जानकारी न हो, उसके विषय में ‘‘यह ऐसा ही है’’ ऐसी बात न कहें

जिस विषय में हमें पूरी जानकारी न हो, उस विषय में निश्‍चय पूर्वक कोई बात नहीं कहनी चाहिये, अन्यथा सुनने वालों को जब अन्य स्त्रोतों से यथार्थ ज्ञान हो जायेगा, तब हमारी स्थिति उपहासास्पद बन जायेगी| लोग हम पर विश्‍वास ही नहीं करेंगे| Continue reading “जान कर बोलें” »

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Story of Sagarcandra, Priyadarsana and Asokadatta

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मुखरता से बचें

मुखरता से बचें

मोहरिए सच्चवयणस्स पलिमत्थू

मुखरता सत्यवचन का विघाता करती है

अधिक बोलने वाले के पेट में कोई बात टिक नहीं पाती – मुखरता को इसीलिए त्याज्य माना गया है| इसे त्याज्य मानने का एक कारण और भी है – सत्य वचन का विघात| Continue reading “मुखरता से बचें” »

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