मनुष्य का जीवन जितना सादा और स्वाभाविक होगा, उसी के अनुसार उसका चित्त अधिक प्रसन्न रहेगा
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लक्ष्मीतिलक नगर में एक दरिद्र वेदसार नामक ब्राह्मण था| उसकी पत्नी का नाम कामलक्ष्मी था| वेदसार ब्राह्मण के वेदविचक्षण नाम का पुत्र था| प्रतिपक्षी राजा ने लक्ष्मीतिलक नगर पर आक्रमण कर दिया| कामलक्ष्मी पानी भरने के लिए नगर के बाहर गई थी| आक्रमण के कारण नगर के दरवाजे बन्द कर दिये| अतः कामलक्ष्मी बाहर ही रह गई| Continue reading “कामलक्ष्मी और उनके पुत्र केवलज्ञानी बने” »

जीवन को वैसा ही मत छोड़ो जैसा तुने पाया था| जीवन को कुछ सुंदर करो| उठाओ तूलिका, जीवन को थोड़े रंग दो| उठाओ वीणा, जीवन को थोड़े स्वर दो| पैरों में बांधों घूंघर, जीवन को थोड़ा नृत्य दो| प्रे दो, प्रीति दो! तोड़ो उदासी| जीवन को थोड़ा उत्सव से भरो| Continue reading “जीवन को थोड़े रंग दो” »
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निम्नलिखित विशेष सावधानियॉं बरतें :-
1. हर कार्य में पानी का छानकर ही उपयोग करें|
2. पानी छानने के बाद गलने को वैसे ही न सूखाएँ, लेकिन छाने हुये पानी को खूब धीरे से गलने पर डाले तथा उस पानी को उसके मूल स्थान पर बहा दें| फिर गलने को सूखा दें|
3. घर से निकलते समय छाने हुए पानी की वॉटरबॅग साथ लें, जिससे कहीं भी बिना छाना पानी पीना न पड़े| Continue reading “पानी के त्रस जीवों की रक्षा करो” »
पहले ज्ञान, फिर दया
कषाय अग्नि है तो श्रुत, शील और तप को जल कहा गया है
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प्रार्थना का मार्ग समर्पण का मार्ग है| प्रार्थना याचना नहीं अर्पणा है| जिससे हृदय के द्वार स्वयमेव खुलते हैं| सूरज का उदय हो और फूल न खिलें तो समझना कि वह फूल नहीं पत्थर है… परमात्मा की प्रार्थना हो और हमारा हृदय न खिले तो जानना चाहिए वह हृदय नहीं पत्थर है| प्रार्थना में जब मॉंग आती है तो भक्त उपासक न रहकर याचक बन जाता है| प्रार्थना एक निष्काम कर्म है| जब भक्त तन्मय होकर प्रार्थना में लग जाता है तो उसकी सारी इच्छाएं स्वतः समाप्त हो जाती है| एक भक्त की सच्ची प्रार्थना इस प्रकार होनी चाहिए…|
करो रक्षा विपत्ति से न ऐसी प्रार्थना मेरी|
विपत्ति से भय नहीं खाऊँ प्रभु ये प्रार्थना मेरी॥
मिले दुःख ताप से शान्ति न ऐसी प्रार्थना मेरी|
सभी दुःखों पर विजय पाऊँ, प्रभु ये प्रार्थना मेरी॥
श्री महावीर जिन स्तवन
Continue reading “वीर जिनेश्वर चरणे लागुं” »