माया मित्रता को नष्ट करती है
मित्रों का नाशक
Ticket, Tax or Talent…Stealing anything is bad
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पूर्वभव में इलाचीकुमारने आलोचना न ली

वसंतपुर नगर में अग्निशर्मा नामक ब्राह्मण युवक रहता था| उसने अपनी पत्नी के साथ चारित्र लिया| परन्तु परस्पर मोह नहीं टूटा| Continue reading “पूर्वभव में इलाचीकुमारने आलोचना न ली” »
Motivational Wallpaper #17
श्वेतांबर हो या दिगंबर हो, बुद्ध हो या अन्य कोई मतवादी हो,
मगर…जो समभाव से भावित आत्मा होगी, वह मोक्ष प्राप्त करेगी| उसमे कोई शंका नहीं
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आलोचना सब को करनी चाहिए
कहेइ अत्तणो वाहि|
एवं जाणगस्स वि सल्लुद्धरणं परसगासे॥
अकिंचनता का अनुभव
लोहो हओ जस्स न किंचणाइ
जिसमें लोभ नहीं होता, उसकी तृष्णा नष्ट हो जाती है और जो अकिंचन है, उसका लोभ नष्ट हो जाता है
श्रुतज्ञान की भक्ति – साल का आठवा कर्तव्य

सिर्फ क्रियासे हम देशआराधक बन सकते हैं, उस में यदि ज्ञान सम्मिलित हो जाए तब हम सर्वआराधक बन सकते हैं| ज्ञानरहित और ज्ञान सहित की क्रिया में जुगनूं और सूर्य का अंतर है| कर्मनिर्जरा के बारे में अज्ञानीके पूर्व करोड़ वर्ष की साधनासे ज्ञानी की श्वासोश्वास जितने समय में की हुई साधना बढ़ जाती है| अज्ञानी तामली तापसने ६० हजार साल तक छट्ठके पारणे छट्ठ किये थे और इक्कीस बार धोये हुए भात से ही पारणा करते थे| Continue reading “श्रुतज्ञान की भक्ति – साल का आठवा कर्तव्य” »
स्नात्र महोत्सव – साल का चौथा कर्तव्य

रोज तो सामान्य रूढ़िगत स्नात्र पढ़ाना चलता है| उसमें विधि पालन की उतनी दरकार नहीं होती| पर सालमें एकबार तो ५६ दिक्कुमारी और ६४ इन्द्रों समेत महामहोत्सव पूर्वक स्नात्र पढ़ाना चाहिये| Continue reading “स्नात्र महोत्सव – साल का चौथा कर्तव्य” »
असली और नकली
अमहग्घए होइ हु जाणएसु
वैडूर्यरत्न के समान चमकने वाले काच के टुकडे का, जानकारों के समक्ष कुछ भी मूल्य नहीं है
अदत्तादान और लोभ
लोभ से कलुषित जीव अदत्तादान (चोरी) करता है














