सूक्ष्म शल्य बड़ी कठिनाई से निकाला जा सकता है
सूक्ष्म शल्य
बुरी संगत

पवन के पिता जी बड़े परेशान थे| कुछ दिनों से पवन बुरी संगत में पड़ गया था| अंत में उन्हें एक युक्ति सूझी| वे बाजार से कुछ आम खरीद कर लाए| सब आम तो पके हुए और बढ़िया थे, पर एक आम काफी सड़ा हुआ था| Continue reading “बुरी संगत” »
श्री अजितनाथजी की चरण पादुकाएँ
Sorry, this article is only available in English. Please, check back soon. Alternatively you can subscribe at the bottom of the page to recieve updates whenever we add a hindi version of this article.
अतिवेल न बोलें
अधिक समय तक एवं अमर्याद न बोलें
श्री सीमंधर स्वामी, मुक्तिना गामी
श्री सीमंधर स्वामी जिन स्तवन
राग : माढ.., नेमि जिन प्यारा…
श्री सीमंधर स्वामी, मुक्तिना गामी, दीठे परमानंद,
प्रभु सुमति आपो, कुमति कापो, टाळो भवभयङ्गंद,
कर्म अरिगण दूर करीने,
तोडो भवतरू कंद रे.
गुरुदेवश्री का आश्वासन

अरे पुण्यशाली मानव! तू वास्तव में धन्यवाद का पात्र है| पाप हो जाना, कोई आश्चर्य नहीं है| मोहनीय कर्म के उदय से किसने कौन-से पाप नहीं किये? क्या मोह ने तीर्थंकर की आत्मा को भी छोड़ा है? क्या उन्होंने अपने पूर्व जीवन में भयंकर पाप नहीं किये? क्या उन पापों से उन्हें सातवी नरक तक नहीं जाना पड़ा? परंतु जीवन की काली-श्याम किताब को धोकर तुझे उज्जवल बनने का मनोरथ हुआ हैं| अतः तू धन्यवाद का पात्र है| तू तो काली किताब का एक-एक पन्ना खोलकर कालिमा को धो रहा है| अतः तू विशेष रूप से धन्यवाद का पात्र है| बालक जैसी सरलता से एक एक पाप निष्कपट भाव से प्रगट कर दे| अरे! आत्मा पर से झिड़क दे इन पापों को| Continue reading “गुरुदेवश्री का आश्वासन” »
निष्प्रयोजन हिंसा
कुछ लोग प्रयोजन से हिंसा करते हैं और कुछ लोग बिना प्रयोजन ही
दर्शनावरणीय कर्म

आँखों से देखने की शक्ति कम करता हैं,
कानों से सुनने की शक्ति कम करता हैं, Continue reading “दर्शनावरणीय कर्म” »
प्रमाद मत कर
हे गौतम! तू क्षण भर के लिए भी प्रमाद मत कर














