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आरंभ से बच्चों में संस्कार डालें

1. शरीर और वस्त्रों की सफाई का पूरा ध्यान रखना|
2. भोजन से पहले और बाद में मुँह हाथ साफ करना|
3. पेट, दांतों, बालों तथा हाथों को सदा साफ रखना| Continue reading “आरंभ से बच्चों में संस्कार डालें” »
Motivational Wallpaper #3
शुद्धात्मा
जिसकी आत्मा भावनायोग से शुद्ध है, वह जल में नौका के समान है
चूहे को भी बिल्ली मुँह से पकड़ती है और अपने बच्चे को भी; परन्तु एक को वह खाना चाहती है और दूसरे को सुरक्षित रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना चाहती है| क्रियाएँ समान होने पर भी भावना में कितना अन्तर है?
किसी पुत्र को उसके पिताजी भी पीटते हैं और अन्य बालक भी; परन्तु पिताजी उसे सुधारना चाहते हैं और अन्य बालक शत्रुतावश ऐसा करते हैं| इस प्रकार पिटाई एक-सी होने पर भी भावों की भिन्नता से परिणाम भिन्न भिन्न होते हैं|
ज्ञानी कहते हैं कि भावों का ही अधिक महत्त्व है| अतः भावनायोग से जिनका अन्तःकरण शुद्ध हो जाता है; वे जल में नौका के समान तैरते हुए उस पार चले जाते हैं; क्योंकि वे शुद्धात्मा हैं|
- सूत्रकृतांग सूत्र 1/15/5
आलोचना-प्रायश्चित्त लेकर शुद्ध बनी पुष्पचूला

पुष्पभद्र नगर में पुष्पकेतु नाम का राजा था| उसकी पुष्पवती नाम की रानी थी| उसने पुष्पचूल और पुष्पचूला नाम के युगल को जन्म दिया| पुष्पचूल और पुष्पचूला परस्पर अत्यन्त प्रेम से बड़े हुए| दोनों एक दूसरे से अलग नहीं रह सकते थे| अब राजा विचार करने लगा कि यदि पुत्री पुष्पचूला का विवाह अन्यत्र करूँगा, तो दोनों का वियोग हो जाएगा| अतः उसने प्रजाजनों की सभा बुलाई| सभा में पुष्पकेतु राजाने प्रश्न किया कि अगर मेरी धरती पर रत्न उत्पन्न हो जाये, तो उसे कहॉं जोड़ना, यह अधिकार किसका है? Continue reading “आलोचना-प्रायश्चित्त लेकर शुद्ध बनी पुष्पचूला” »
संग्रह न करे !
अधिक प्राप्त होने पर भी संग्रह नहीं करना चाहिये
विषय-विरक्ति
वान्त पीना चाहते हो ? इससे तो तुम्हारा मर जाना अच्छा है
Birth Ceremonies
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ज्ञान का सार
जं न हिंसइ किंचणं
अहिंसा या दया एक धर्म है; किन्तु इसका सम्यक् परिपालन करने से पहले ज्ञान होना आवश्यक है
अनेकान्तवादी बनें
स्याद्वाद से युक्त वचनों का प्रयोग करना चाहिये
‘स्याद्वाद’ एक दार्शनिक सिद्धान्त है| ‘स्यात्’ का अर्थ अपेक्षा है; इसलिए इसे सापेक्षवाद भी कह सकते हैं| वैसे किसी एक बात का आग्रह न होने से यह ‘अनेकान्तवाद’ के नाम से ही दुनिया में अधिक प्रसिद्ध है| Continue reading “अनेकान्तवादी बनें” »














