लोभ सब कुछ नष्ट कर देता है
लोभ सर्वनाशक है
लोहो सव्वविणासणो
क्रोध प्रेम का, मान विनय का और माया अथवा छल मित्रों का नाशक है; परन्तु लोभ इन सबमें प्रबल है| वह समस्त सद्गुणों को नष्ट कर देता है| Continue reading “लोभ सर्वनाशक है” »
रसना पर अंकुश
अप्पपिण्डासि पाणासि अप्पं भासेज्ज सुव्वए
सुव्रती व्यक्ति कम खाये, कम पीये और कम बोले
श्रावक के जीवनभर करने योग्य १८ कर्तव्य
जम्मंमि वासठाणं तिवग्गसिद्धई कारणं उचिअं|
उचिअं विज्जागहणं पाणिगहणं च मित्ताई॥
उचिअं विज्जागहणं पाणिगहणं च मित्ताई॥
पाप श्रमण
सुच्चा पिच्चा सुहं सुवइ पावसमणे त्ति वुच्चइ
जो खा-पीकर आराम से सोता है, वह पापश्रमण कहलाता है
कर्त्ता – भोक्ता
अप्पा कत्ता विकत्ता य, दुहाण या सुहाण च
आत्मा ही सुख दुःख का कर्त्ता और भोक्ता है
हम अच्छे कार्य करते हैं; तो अपने लिए सुख का निर्माण करते हैं और यदि बुरे कार्य करते हैं; तो दुःख का निर्माण करते हैं| इस प्रकार हम स्वयं ही सुख-दुःख के निर्माता हैं, बनाने वाले हैं| Continue reading “कर्त्ता – भोक्ता” »
Wallpaper #3
असंवृत्तों का मोह
मोहं जंति नरा असंवुडा
असंवृत मनुष्य मोहित हो जाते हैं
अज्ञानी क्या करेगा ?
अन्नाणी किं काही, किं जानाहि सेयपावगं
ज्ञानहीन व्यक्ति क्या करेगा? वह पुण्य पाप को कैसे जानेगा?
आतङ्कदर्शी
आयंकदंसी न करेइ पावं
आतंकदर्शी पाप नहीं करता
छः कोस (गाउ) की प्रदक्षिणा की भावयात्रा
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