लोभी और चञ्चल व्यक्ति झूठ बोला करता है
लोभ और चंचलता
लद्धो लोलो भणेज्ज अलियं
जो वस्तु जैसी है, उसे वैसी न कहना अयथार्थ वचन है – झूठी बात है| झूठ कौन बोलता है ? इस प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा गया है कि जो व्यक्ति लोभी होता है, वह अपनी तृष्णा तो तृप्त करने के लिए झूठ बोलता है| तृष्णा कभी तृप्त नहीं होती – यह एक वास्तविकता है; परन्तु लोभी इस वास्तविकता से अनभिज्ञ बना रह कर जीवनभर तृष्णा-तृप्ति का प्रयास करता ही रहता है| इस प्रयास में उसे कभी सफलता नहीं मिलती; फिर भी वह निरन्तर इसके लिए दौड़धूप करता ही रहता है और कदम कदम पर झूठ बोलने को तैयार रहता है| Continue reading “लोभ और चंचलता” »
झूठ बोलने लगता है
लोभपत्ते लोभी समावइज्जा मोसं वयणाए
लोभ का प्रसंग आने पर लोभी झूठ बोलने लगता है
सादि सान्त
सरीरं सादियं सनिधणं
शरीर सादि है और सान्त भी
1) अनादि अनन्त
2) अनादि सान्त
3) सादि अनन्त
4) सादि सान्त
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Story of Sagarcandra, Priyadarsana and Asokadatta
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मुखरता से बचें
मोहरिए सच्चवयणस्स पलिमत्थू
मुखरता सत्यवचन का विघाता करती है
जान कर बोलें
जमट्ठं तु न जाणेज्जा, एवमेयंति नो वए
जिसके विषय में पूरी जानकारी न हो, उसके विषय में ‘‘यह ऐसा ही है’’ ऐसी बात न कहें
इच्छानिरोध
छंदं निरोहेण उवेइ मोक्खं
इच्छाओं को रोकने से ही मोक्ष प्राप्त होता है















