1 0
post icon

लोभ सर्वनाशक है

लोभ सर्वनाशक है

लोहो सव्वविणासणो

लोभ सब कुछ नष्ट कर देता है

क्रोध प्रेम का, मान विनय का और माया अथवा छल मित्रों का नाशक है; परन्तु लोभ इन सबमें प्रबल है| वह समस्त सद्गुणों को नष्ट कर देता है| Continue reading “लोभ सर्वनाशक है” »

Leave a Comment
post icon

Wallpaper #3

One who, even after knowing the whole universe, can remain unaffected & unattached is God

Standard Screen Widescreen
1024×768 1440×900
1600×1200 1920×1080

Leave a Comment
post icon

पाप श्रमण

पाप श्रमण

सुच्चा पिच्चा सुहं सुवइ पावसमणे त्ति वुच्चइ

जो खा-पीकर आराम से सोता है, वह पापश्रमण कहलाता है

भोजन शरीरयात्रा के लिए है| शरीर की शक्ति टिकाये रखने के लिए है; परन्तु जीवन की सफलता शक्ति को टिकाये रखने में नहीं, उसका सदुपयोग करने में है| Continue reading “पाप श्रमण” »

Leave a Comment
post icon

अज्ञानी क्या करेगा ?

अज्ञानी क्या करेगा ?

अन्नाणी किं काही, किं जानाहि सेयपावगं

ज्ञानहीन व्यक्ति क्या करेगा? वह पुण्य पाप को कैसे जानेगा?

द्रव्यगुण पर्यायविषयक बोध को ज्ञान कहते हैं| ज्ञान का अभाव अज्ञान है| अज्ञान के तीन प्रकार हैं – देश अज्ञान, सर्व अज्ञान और भाव अज्ञान| Continue reading “अज्ञानी क्या करेगा ?” »

Leave a Comment
post icon

असंवृत्तों का मोह

असंवृत्तों का मोह

मोहं जंति नरा असंवुडा

असंवृत मनुष्य मोहित हो जाते हैं

जो असंयमी हैं – इन्द्रियों को जो अपने वश में नहीं रख सकते – मन पर जिनका बिल्कुल अधिकार नहीं है; ऐसे लोग विषयों के प्रति शीघ्र आकर्षित हो जाते हैं| Continue reading “असंवृत्तों का मोह” »

Leave a Comment
post icon

आतङ्कदर्शी

आतङ्कदर्शी

आयंकदंसी न करेइ पावं

आतंकदर्शी पाप नहीं करता

संसार में ऐसा कौन प्राणी है, जो दुःखी न हो? कोई न कोई दुःख प्रत्येक जीव के पीछे लगा ही रहता है| जन्म का, मृत्यु का और बुढ़ापे के दुःख तो अनिवार्य है ही; जिस का सबको अनुभव करना पड़ता है; परन्तु इसके अतिरिक्त रोग, शोक, वियोग, अपमान, चोट, जलन, कटु शब्द, करूपता, दुर्गन्ध, बेस्वाद भोजन, कठोर स्पर्श, बन्धन, निर्धनता, तिरस्कार, मालिक की फटकार, दौड़धूप आदि सैकड़ों दुःख हैं; जिनसे प्राणी निरन्तर कष्ट पा रहे हैं, व्याकुलता का अनुभव कर रहे हैं, छटपटा रहे हैं| Continue reading “आतङ्कदर्शी” »

Leave a Comment
post icon

कर्त्ता – भोक्ता

कर्त्ता   भोक्ता

अप्पा कत्ता विकत्ता य, दुहाण या सुहाण च

आत्मा ही सुख दुःख का कर्त्ता और भोक्ता है

सुख और दुःख अपने ही कार्यों एवं विचारों के फल हैं; दूसरों के नहीं|

हम अच्छे कार्य करते हैं; तो अपने लिए सुख का निर्माण करते हैं और यदि बुरे कार्य करते हैं; तो दुःख का निर्माण करते हैं| इस प्रकार हम स्वयं ही सुख-दुःख के निर्माता हैं, बनाने वाले हैं| Continue reading “कर्त्ता – भोक्ता” »

Leave a Comment
post icon

समझ लीजिये

समझ लीजिये

संबुज्झह, किं न बुज्झह?
संबोही खलु पेच्च दुल्लहा

समझो! क्यों नहीं समझते मरने पर संबोध निश्‍चित रूप से दुर्लभ है

अपने अपने शुभाशुभ कर्मों का भोग करते हुए प्राणी इस संसार में चौरासी लाख योनियों में जन्म लेते और मरते रहते हैं| मनुष्य मर कर मनुष्य के रूप में ही जन्म लेता है – ऐसा निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता| Continue reading “समझ लीजिये” »

Leave a Comment
post icon

छः कोस (गाउ) की प्रदक्षिणा की भावयात्रा

Sorry, this article is only available in English. Please, check back soon. Alternatively you can subscribe at the bottom of the page to recieve updates whenever we add a hindi version of this article.

Leave a Comment
post icon

लाभ – अलाभ

लाभ   अलाभ

लाभुत्ति न मज्जिज्जा, अलाभुत्ति न सोइज्जा

लाभ होने पर घमण्ड में फूलना नहीं चाहिये और लाभ न होने पर शोक नहीं करना चाहिये

प्रयत्न के दो ही परिणाम होते हैं – लाभ या अलाभ| प्रयत्न सफल होने पर लाभ होता है और असफल होने पर अलाभ| लाभ से प्रयत्न की प्रेरणा मिलती हैऔर अलाभ से प्रयत्न में शिथिलता आती है; परन्तु इसके साथ ही साथ दोनों अवस्थाओं में एक-एक दुष्परिणाम भी होता है| Continue reading “लाभ – अलाभ” »

Leave a Comment
Page 57 of 67« First...102030...5556575859...Last »