मायावी और प्रमादी फिर से गर्भ में आते हैं
गर्भ में आते हैं
माई पमाई पुण एइ गब्भं
गर्भ में आने का अर्थ है – जन्म धारण करना और जन्म धारण करने का अर्थ है – एक दिन सब छोड़ कर मर जाना अर्थात् जन्म-मरण के चक्कर में पड़े रहना| Continue reading “गर्भ में आते हैं” »
लाभ और लोभ
जहा लाहो तहा लोहो, लाहा लोहो पवड्ढइ
ज्यों-ज्यों लाभ होता है, त्यों त्यों लोभ होता है और लाभ से लोभ बढ़ता रहता है
सफलता से उत्साह बढ़ता है और विफलता से वह नष्ट हो जाता है| Continue reading “लाभ और लोभ” »
थूक न चाटें
से मइमं परिय मा य हु लालं पच्चासी
बुद्धिमान साधक लार चाटने वाला न बने अर्थात् परित्यक्त भोगों की पुनः कामना न करे
असंविभागी
असंविभागी न हु तस्स मोक्खो
जो संविभागी नहीं है अर्थात् प्राप्त सामग्री को साथियों में बॉंटता नहीं है, उसकी मुक्ति नहीं होती
समय को पहचानिये
अणभिक्कंतं च वयं संपेहाए,
खणं जाणाहि पंडिए
खणं जाणाहि पंडिए
हे बुद्धिमान साधक! अवशिष्ट आयु को देखते हुए समय को पहचान-अवसर का मूल्य समझ
सच्ची शिक्षा
अट्ठजुत्ताणि सिक्खिज्जा,
निरट्ठाणि उवज्जए
निरट्ठाणि उवज्जए
निरर्थक शिक्षा छोड़कर सार्थक शिक्षा ही ग्रहण करें
पूरण सुख शिवसद्मना
श्री श्रेयांश्नाथ जिन स्तवन
राग : परमातम पूरण कला…
Continue reading “पूरण सुख शिवसद्मना” »


















