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सिंह-सी निर्भयता

सिंह सी निर्भयता

सीहो व सद्देण न संतसेज्जा

सिंह के समान निर्भीक; केवल शब्दों से न डरिये

सिंह कितना निर्भय होता है! हाथी की चिंघाड़ से भी वह नहीं डरता| यद्यापि हाथी के शरीर से उसका शरीर बहुत छोटा होता है; फिर भी उसकी साहसिकता – उसकी वीरता उसमें प्रशंसनीय निर्भयता के भाव जगा देती है, जिससे कि वह चिंघाड़ के प्रति भी लापरवाह बन जाता है| इसी प्रकार वीर पुरुष भी शत्रुओं की ललकार से नहीं डरते; जो डर जाते हैं, वे वीर नहीं कायर हैं| Continue reading “सिंह-सी निर्भयता” »

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शिक्षा का प्रारम्भ

शिक्षा का प्रारम्भ

एवं खु तप्पालणे वि धम्मो
एक दिन एक महिला एक वरिष्ठ ज्ञानी व्यक्ति के पास गई और पूछा, ‘‘बाबा, कृपा करके मुझे यह बताइए कि मुझे अपने नन्हें-मुन्ने बेटे की शिक्षा कब प्रारम्भ करनी चाहिए?’’ Continue reading “शिक्षा का प्रारम्भ” »

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सम्मान की इच्छा मत करो

सम्मान की इच्छा मत करो

सम्माननं परां हानिं योगर्द्धेः कुरुते यतः
उत्तम पुरुष विकारों से विमुक्त होता हुआ पूजा एवं यश का इच्छुक न बनकर जीवन व्यतीत करता है| तुम्हें कोई भाग्यवान कहे तो फूलो मत… तुम्हें कोई बुद्धिमान या धनवान कहे तो खिलो मत… क्योंकि उनका बुद्धि का तराजू पत्थर तोलने का है… हीरा तोलने का नहीं| ध्वनियों में सबसे मधुर है प्रशंसा की ध्वनि| अतः इस ध्वनि से बचते रहो… कम से कम धर्म के अनुष्ठान तो कीर्ति, यश और प्रशंसा से दूर रहकर ही करें|

करनी ऐसी कीजिए जिसे न जाने कोय|
जैसे मेहंदी पात में बैठी रंग छुपाय॥

काम करना आपका काम है…..बस सिर्फ काम करें…..नाम नहीं चाहें…..धर्म करना आपकी आत्मा का स्वभाव है, तो सम्मान की इच्छा मत करो|

यह आलेख इस पुस्तक से लिया गया है
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हिंसा न करें

हिंसा न करें

सव्वेसिं जीवियं पियं,
नाइवाएज्ज कंचणं

सबको जीवन प्रिय है, किसीके प्राणों का अतिपात नहीं चाहिये

कौन प्राणी है, जो जीवित रहना नहीं चाहता? अपना-अपना जीवन सभीको प्यारा लगता है| मनुष्य का जीवन कितना मूल्यवान् है – इसका पता तब लगता है, जब उसके सामने एक ओर करोड़ों स्वर्णमुद्राओं के साथ उसकी मृत्यु तथा दूसरी ओर साधारण अबल के साथ उसका जीवन रखकर इनमें से किसी एक का चयन करने के लिए उसे कहा जाये| Continue reading “हिंसा न करें” »

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मत बन विषय विलासी रे मनवा

Listen to मत बन विषय विलासी रे मनवा

राग : कित गुण भयो है उदासी बिहाग
भाव : विषय विलास = आत्म विनाश एना त्यागनी पावन प्रेरणा

मत बन विषय विलासी रे मनवा,
ए जबरी जग फांसी. रे मनवा.
हतस्त हरिण मच्छ भ्रमर पतंग,
एक एक विषयना आशी.

…रे म.१

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यथावादी तथाकारी

यथावादी तथाकारी

करणसच्चे वट्टमाणे जीवे
जहावाई तहाकारी या वि भवइ

करणसत्य में रहनेवाला जीव जैसा बोलता है, वैसा ही करता है

जो कभी पाप न स्वयं करता है, न दूसरों से कराता है और न किसी पापी के कार्यों का अनुमोदन ही करता है, वह करण सत्य में रहनेवाला जीव है| ऐसे सज्जन व्यक्ति का व्यवहार शुद्ध और सच्चा होता है| उसके मन-वचन और काया के व्यापारों में एकता होती है| Continue reading “यथावादी तथाकारी” »

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मुरझाये फूल जिन्होंने आलोचना नहीं ली

मुरझाये फूल जिन्होंने आलोचना नहीं ली
रज्जा साध्वी ने सचित्त पानी पीया

रज्जा साध्वीजी को कोढ़ रोग हो गया था| एक साध्वीजी ने उससे पूछा कि यह रोग आपको कैसे हुआ? तब उसने कहा कि अचित्त (उबाला हुआ) पानी पीने से गर्मी के कारण यह रोग हुआ है| Continue reading “मुरझाये फूल जिन्होंने आलोचना नहीं ली” »

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Quote #10

Technology without Humanity is insanity.
Unknown
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