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हां रे हुं तो मोह्यो रे लाल

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श्री संभवनाथ जिन स्तवन

हां रे हुं तो मोह्यो रे लाल,
जिन मुखडाने मटके;
जिन मुखडाने मटके वारी जाउं,
प्रभु मुखडाने मटके.

…हांरे. १

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रात्रि जागरण – साल का सातवा कर्तव्य

रात्रि जागरण   साल का सातवा कर्तव्य
जब कल्पसूत्र, प्रभुका पारणा इत्यादि घर पर लाते हैं, तब घर भी मानो मंदिर बन जाता है| उस समय प्रभुके मंगलगीत, भावना इत्यादिद्वारा रात्रि जागरण करना वह श्रावक का कर्तव्य है| व्यापार-धंधा, ढ.त. इत्यादि के लिए रात्रि में एक-दो बजे तक जागनेवाले प्रायः रोज रात को अधर्म जागरण करते हैं क्योंकि सतत अशुभ भावोमें रहते हैं| Continue reading “रात्रि जागरण – साल का सातवा कर्तव्य” »

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उर्जा बचाओ…देश बचाओ…

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आस्रव-संवर

आस्रव संवर

समुप्पायमजाणंता, कहं नायंति संवरं|

आस्रव को न जानने वाले संवर को कैसे जान सकते है?

एक विशाल सरोवर की कल्पना कीजिये| उसमें एक नौका तैर रही है| नौका में अनेक यात्री बैठे हैं| धीरे-धीरे नौका डूबने लगती है| नौका में पानी का प्रवेश होने लगता है| यात्री डूबने के डर से चिल्लाते हैं – ‘अरे इस पानी को रोको-जैसे भी बने इस पानी का आना बन्द करो! Continue reading “आस्रव-संवर” »

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जयणा हमारी माता

जयणा हमारी माता
अष्टप्रवचन माता यदि साधु की माता है, तो जयणा श्रावक की माता है| जयणा याने जीवरक्षा के प्रति सावधानी|

हमारे चारों तरफ विशाल जीवसृष्टि बिखरी हुई है| आँगन में बिल्लीयॉं हैं तो, गलियों में कुत्ते फिरते हैं| रसोई घर में झिंगुर है तो, शयनकक्ष में खटमल हैं| बिलो में चूहे रहते हैं तो, कहीं चींटियों के दर हैं| बालों में जूं है, छत व दिवारों पर पक्षियों के घोंसले है तो कहीं मकड़ी के जाले हैं| फर्नीचर व दीवार पर दीमक फैली हुई है| चारों तरफ मच्छर उड़ रहे हैं| नल में से आ रहे पानी में असंख्य त्रस जीव हैं| अनाज मे लट वगैरह है, तो साग-सब्जी में भी कई जीव, लट वगैरह मिलते हैं| Continue reading “जयणा हमारी माता” »

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अड़ियल टट्टू

अड़ियल टट्टू

मा गलियस्सेव कसं, वयणमिच्छे पुणो पुणो

बार बार चाबुक की मार खाने वाले गलिताश्‍व (अड़ियल टट्टू) की तरह कर्तव्यपालन के लिए बार-बार गुरुओं के निर्देश की अपेक्षा मत रखो

नित्य करने के लिए जो कर्त्तव्य निर्दिष्ट हो, उसे बिना कहे स्वयं प्रेरणा से प्रतिदिन करते रहने में ही शिष्य की शोभा है| विवेकी सुविनीत शिष्य ऐसा ही करते हैं और अपने गुरुओं के हृदय में स्थान पा लेते हैं| Continue reading “अड़ियल टट्टू” »

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श्री हरिभद्रसुरी

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बन्धनमुक्त नहीं हो सकता

बन्धनमुक्त नहीं हो सकता

न यावि मोक्खो गुरुहीलणाए

गुरुजनों की अवहेलना करनेवाला कभी बन्धनमुक्त नहीं हो सकता|

परतन्त्रता बन्धन है, स्वतन्त्रता मुक्ति| सुख स्वतन्त्रता में ही रहता है, परतन्त्रता में नहीं| कहावत है कि पराधीन व्यक्ति स्वप्न में भी सुखी नहीं हो सकता| Continue reading “बन्धनमुक्त नहीं हो सकता” »

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पूछ कर लीजिये

पूछ कर लीजिये

अणुविय गेण्हियव्वं

अनुज्ञा लेकर (ही कोई वस्तु) ग्रहण करनी चाहिये

बिना पूछे किसी की कोई वस्तु उठा लेना और उसका उपयोग कर लेना चोरी का ही एक प्रकार है| कुछ लोग विनोद के लिए मित्र की वस्तु छिपा देते हैं और जब वह उसे परेशान होकर ढूँढने लगता है, तब हँसते हैं और वस्तु लौटा देते हैं| Continue reading “पूछ कर लीजिये” »

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निगोद को पहचानें

निगोद को पहचानें
(चार्तुास) वर्षा ऋतु में घर के कम्पाऊंड में, पुरानी दीवारों पर अथवा मकान की छत (अगासी) पर हरी, काली, कत्थई आदि रंगों की काई (सेवाल-लील) जम जाती है| उसी को निगोद कहते हैं| Continue reading “निगोद को पहचानें” »

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