श्री संभवनाथ जिन स्तवन
हां रे हुं तो मोह्यो रे लाल,
जिन मुखडाने मटके;
जिन मुखडाने मटके वारी जाउं,
प्रभु मुखडाने मटके.
श्री संभवनाथ जिन स्तवन
हां रे हुं तो मोह्यो रे लाल,
जिन मुखडाने मटके;
जिन मुखडाने मटके वारी जाउं,
प्रभु मुखडाने मटके.

जब कल्पसूत्र, प्रभुका पारणा इत्यादि घर पर लाते हैं, तब घर भी मानो मंदिर बन जाता है| उस समय प्रभुके मंगलगीत, भावना इत्यादिद्वारा रात्रि जागरण करना वह श्रावक का कर्तव्य है| व्यापार-धंधा, ढ.त. इत्यादि के लिए रात्रि में एक-दो बजे तक जागनेवाले प्रायः रोज रात को अधर्म जागरण करते हैं क्योंकि सतत अशुभ भावोमें रहते हैं| Continue reading “रात्रि जागरण – साल का सातवा कर्तव्य” »
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आस्रव को न जानने वाले संवर को कैसे जान सकते है?

अष्टप्रवचन माता यदि साधु की माता है, तो जयणा श्रावक की माता है| जयणा याने जीवरक्षा के प्रति सावधानी|
हमारे चारों तरफ विशाल जीवसृष्टि बिखरी हुई है| आँगन में बिल्लीयॉं हैं तो, गलियों में कुत्ते फिरते हैं| रसोई घर में झिंगुर है तो, शयनकक्ष में खटमल हैं| बिलो में चूहे रहते हैं तो, कहीं चींटियों के दर हैं| बालों में जूं है, छत व दिवारों पर पक्षियों के घोंसले है तो कहीं मकड़ी के जाले हैं| फर्नीचर व दीवार पर दीमक फैली हुई है| चारों तरफ मच्छर उड़ रहे हैं| नल में से आ रहे पानी में असंख्य त्रस जीव हैं| अनाज मे लट वगैरह है, तो साग-सब्जी में भी कई जीव, लट वगैरह मिलते हैं| Continue reading “जयणा हमारी माता” »
बार बार चाबुक की मार खाने वाले गलिताश्व (अड़ियल टट्टू) की तरह कर्तव्यपालन के लिए बार-बार गुरुओं के निर्देश की अपेक्षा मत रखो
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गुरुजनों की अवहेलना करनेवाला कभी बन्धनमुक्त नहीं हो सकता|
अनुज्ञा लेकर (ही कोई वस्तु) ग्रहण करनी चाहिये

(चार्तुास) वर्षा ऋतु में घर के कम्पाऊंड में, पुरानी दीवारों पर अथवा मकान की छत (अगासी) पर हरी, काली, कत्थई आदि रंगों की काई (सेवाल-लील) जम जाती है| उसी को निगोद कहते हैं| Continue reading “निगोद को पहचानें” »