बार बार चाबुक की मार खाने वाले गलिताश्व (अड़ियल टट्टू) की तरह कर्तव्यपालन के लिए बार-बार गुरुओं के निर्देश की अपेक्षा मत रखो
अड़ियल टट्टू
श्री हरिभद्रसुरी
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बन्धनमुक्त नहीं हो सकता
गुरुजनों की अवहेलना करनेवाला कभी बन्धनमुक्त नहीं हो सकता|
पूछ कर लीजिये
अनुज्ञा लेकर (ही कोई वस्तु) ग्रहण करनी चाहिये
निगोद को पहचानें

(चार्तुास) वर्षा ऋतु में घर के कम्पाऊंड में, पुरानी दीवारों पर अथवा मकान की छत (अगासी) पर हरी, काली, कत्थई आदि रंगों की काई (सेवाल-लील) जम जाती है| उसी को निगोद कहते हैं| Continue reading “निगोद को पहचानें” »
Motivational Wallpaper #4
जैन साधु के विशिष्ट नियम
१) भयंकर गर्मी की ऋतु में प्यास लगने पर भी रात्रि में पानी नहीं पीते|
२) वे काष्ट, लकड़ी, मिट्टी के पात्र ही उपयोग में लेते हैं| स्टील या अन्य धातु के बर्तन काम में नहीं लेते|
३) वे चार महीने तक, वर्षावास में एक स्थान पर स्थिर रहते हैं और शेष समय जिनाज्ञा अनुसार परिभ्रमण करते हैं| Continue reading “जैन साधु के विशिष्ट नियम” »
Serve your parents
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संघपूजा – साल का पहला कर्तव्य

जैसे पर्युषण के पॉंच कर्तव्यों का पालन करना है, ठीक उसी तरह सालभर के ग्यारह कर्तव्य का भी यथाशक्ति पालन अवश्य करना चाहिए|
तह य जत्ततिगं|
जिणगिहण्हवणं जिणधणवुड्ढि
महपूअ (धम्म) जागरिआ॥
सुअपूआ उज्जवणं तहेव तित्थपभावणा सोही॥
सालभर में (१) संघपूजा (२) साधर्मिक भक्ति (३) यात्रात्रिक (४) स्नात्रपूजा (५) देवद्रव्यवृद्धि (६) महापूजा (७) धर्मजागरण (८) श्रुतपूजा (९) उद्यापन (१०) तीर्थप्रभावना और (११) प्रायश्चित्त….. ऐसे ग्यारह कर्तव्यों का पालन करना चाहिए| Continue reading “संघपूजा – साल का पहला कर्तव्य” »
गुरु विनय
तस्संतिए वेणइयं पउंजे
जिसके निकट रह कर धर्म के पद सीखे हों, उसके प्रति विनयपूर्ण व्यवहार रखना चाहिये














