अज्ञ अभिमान करते हैं
अज्ञ अभिमान करते हैं
दैनिक-चर्या का प्रभाव

हम बच्चों को अपने अनुशासन में रखना चाहते हैं, तो हमें भी अपने दैनिक कार्यक्रम व्यवस्थित और यथा समय करना आवश्यक है| आपके नियमित आचरण से बच्चों को सुन्दर प्रेरणा मिलती है| Continue reading “दैनिक-चर्या का प्रभाव” »
जीवन और रूप
जीवन और रूप विद्युत् की गति के समान चंचल होते हैं
भूल दुहराऊँगा नहीं !
जमहं पुव्वमकासो पमाएणं
मेधावी साधक को आत्मपरिज्ञान के द्वारा यह निश्चय करना चाहिये कि मैंने पूर्वजीवन में प्रमादवश जो कुछ भूल की है, उसे अब कभी नहीं करूँगा
समान भाव रहें
जहा तुच्छस्स कत्थई, तहा पुण्णस्स कत्थई|
जैसे पुण्यवान को कहा जाता है, वैसे ही तुच्छ को और जैसे तुच्छ को कहा जाता है, वैसे ही पुण्यवान को
विषयकी कैसे कटे मोरी चाह
राग : गुरु बिन कौन बतावे वाट वागेश्वरी
भाव : विषय लगन नी चाह ने मिटाववा माटे नु दर्दभर्यु ब्यान
विषयकी कैसे कटे मोरी चाह,
करती यह फनाह.
पांच ईन्द्रियो पोषे इसको,
मन हैं ईसका नाह.
बूढे बैल
चढ़ाई के मार्ग में बूढे बैलों की तरह साधनामार्ग की कठिनाई में अज्ञ लोग खि होते हैं
सरलता और सन्तोष
लोहं सन्तोसओ जिणे
माया को ऋजुता से और लोभ को सन्तोष से जीतें
वाणी कैसी हो?
हितकर सच्ची बात कहनी चाहिये
सफलता का गुप्त मंत्र

मैं महान हूँ, अब तक मैं बाह्य जड़ पदार्थो में लुभाकर सुख की खोज करता रहा किन्तु कहीं शान्ति न मिली, वास्तव में सुख है आत्मा में| सम्पूर्ण सुखों का केन्द्र है आत्मा| मैं प्रेमी हूँ, प्रेम ही मेरा जीवन है, मैं प्राणी मात्र की सेवा का प्रेमी हूँ| मैं सुखी हूँ| सफलता मेरे दाये बांये चलती है| Continue reading “सफलता का गुप्त मंत्र” »

















