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दिव्य शक्ति जागृत कब होगी?

जबकि तुम निंदा, ईर्षा, छिद्रान्वेषण, चञ्चलता और मोह से बचकर प्रेम समभाव एवं सन्तोष से अपने मन को सुशिक्षित करोगे|
भय मनुष्य का भयंकर शत्रु है, इसकी जड़ को मन से निर्मूल कर दो, पतन की ओर ले जाने वाली चिंताओं को हृदय से सदा के लिए अलग कर दो| ध्वंसकारी विचार ही तुम्हें निर्बल और मुर्दा बनाते हैं| इससे न तो जीवन को नवीन प्रकाश मिलता है न नसों में नए रक्त का संचार होता है| रक्त संचार के अभाव में मनुष्य दीन हीन बन, असमय में युवावस्था से हाथ धो, अपनी शक्ल सूरत को बूढेपन में बदल देता हैं| Continue reading “दिव्य शक्ति जागृत कब होगी?” »
सुविधि जिनेसर पाय नमीने
श्री सुविधिनाथ जिन स्तवन
राग : केदारो – ‘‘एम धन्नो धणने परचावे रे…’’ ए देशी
सुविधि जिनेसर पाय नमीने, शुभ करणी एम कीजे रे;
अति घणो ऊलट अंग धरीने, प्रह ऊठी पूजीजे रे.
Ninth Incarnation as a physician Jivananda
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Refutation of Maya – Part 3
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अब मोहे तारो सुमति जिनेश
श्री सुमतिनाथ स्तवन
राग : वाघेश्वरी
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अवधू ! आज सुहागन नारी
आज सुहागन नारी अवधू ! आज सुहागन नारी,
मेरे नाथ आप सुध लीनी कीनी निज अंगचारी.
वृद्धावस्था
ण रतीए, ण विभूसाए
वृद्ध होने पर व्यक्ति न हास-परिहास के योग्य रहता है, न क्रीड़ा के, न रति के और न शृंगार के ही
विषलिप्त कॉंटा
विसलित्तं व कंटगं नच्चा
विषलिप्त कॉंटे की तरह जानकर ब्रह्मचारी स्त्री का त्याग करे
पुष्प समान जीवन मिले

गुरुजनों का प्रदेश… अर्थात गुर्जर देश… पिया के घर जाती हुई एक नयी नवेली दुल्हन ने… गरवी गुजरात के राष्ट्रसंत श्री रविशंकर महाराज से चरण स्पर्श कर आशिष मॉंगा…| Continue reading “पुष्प समान जीवन मिले” »













