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जैन कहो क्युं होवे
भाव : जैनो नी परिभाषाने अने साचा जैनत्वने समजावतु वर्णन
जैन कहो क्युं होवे, परमगुरु!
जैन कहो क्युं होवे
गुरु उपदेश बिना जन मूढा,
दर्शन जैन विगोवे.
…परम.१
Wallpaper #4
सदाचार का मूल
नादंसणिस्स नाणं, नाणेण विणा न होंति चरणगुणा
सम्यग्दर्शन के अभाव में ज्ञान प्राप्त नहीं होता और ज्ञान के अभाव में चारित्र-गुण प्राप्त नहीं होते
दुःखप्रदायकता
सव्वे कामा दुहावहा
सभी काम दुःखप्रद होते हैं
चमत्कारी भोजन
आरोग्यरहस्यम्
मायामृषावाद
सादियं न मुसं बूया
मन में कपट रखकर झूठ नहीं बोलना चाहिये
सप्तम जिनवर सेवीए
श्री सुपार्श्वनाथ जिन स्तवन
राग : दिलरंजन जीनराजजी…(ये जींदगी उसीकी है)
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साधुओं की प्रसन्नता
महप्पसाया इसिणो हवंति
ऋषि सदा प्रसन्न रहते हैं
सम्राट प्रजापल के प्रश्न

प्रश्न – बिना आग के कौन जलाती है ?
उत्तर – ईर्ष्या, तृष्णा, चिन्ता, कर्जदारी, नव-जवान कुंआरी लड़की, विधवा बहु-बेटी| Continue reading “सम्राट प्रजापल के प्रश्न” »
















