संयम और तप से आत्मा को भावित (पवित्र) करता हुआ साधक विहार करता है
संयम और तप
दुःख कोई बाँट नही सकता
कोई किसी दूसरे के दुःख को बाँट नहीं सकता
मृत्यु का आगमन
मृत्यु किसी भी समय आ सकती है
परिहास न करें
बुद्धिमान को कभी उपहास नहीं करना चाहिये
Personal Description of the Lord
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उत्तम शरण
धर्म द्वीप है, प्रतिष्ठा है, गति है और उत्तम शरण है
जीव विचार – गाथा 2
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उद्यापन – साल का नौवां कर्तव्य

सम्यग्दर्शन, ज्ञान, चारित्र के, जिनालय के, पढ़ाई के, सामायिक, पौषध आदि के और साधु-साध्वीजी भगवंत के उपकरण इत्यादिको तैयार करके उद्यापन करना चाहिए| संसार में परिभ्रमण करानेवाले साधन को अधिकरण कहते हैं और मोक्षमार्गमें सहायक बनने वाले साधन को उपकरण कहते हैं| कपड़े धोने का डंडा अधिकरण और साधुका दंड उपकरण| Continue reading “उद्यापन – साल का नौवां कर्तव्य” »
अनाथ नाथ नहीं हो सकता
कहं नाहो भविस्ससि?
तू स्वयं अनाथ है, तो फिर तू दूसरे का नाथ कैसे हो सकता है ?
प्रियकर प्रियवादी
प्रिय करनेवाला और प्रिय बोलनेवाला अपनी शिक्षा प्राप्त करने में समर्थ होता है















