साधक को कोई यदि दुर्वचन कहे; तो भी वह उस पर क्रोध न करे
क्रोध न करें
परिवार की दृष्टि से न गिरो

कई बेसमझ अज्ञान महिलाएँ अपने भर्तार और घर की आय-व्यय का विचार न कर, वे विशेष वस्त्रालंकार श्रृंगार की वस्तुओं के लिये मरती हैं, कलह कर बैठती हैं| इसी मनमुटाव के कारण वे शनै: शनै: अपने परिवार और समाज की दृष्टि से गिर जाती हैं| Continue reading “परिवार की दृष्टि से न गिरो” »
शंका हो तो न बोलें
एवमेयं ति नो वए
जिस विषय में अपने को शंका हो, उस विषय में ‘‘यह ऐसी ही है’’ ऐसी भाषा न बोलें
सम्प्रति महाराज
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बुद्धिवाद
बुद्धि ही धर्म का निर्णय कर सकती है
Establishment of Customs
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सो क्या जाने पीर पराई ?
जे बहिया जाणइ, से अज्झत्थं जाणइ|
जो अभ्यन्तर को जानता है, वह बाह्य को जानता है और जो बाह्य को जानता है वह अभ्यन्तर को जानता है
मृदुता को अपनाइये
मान को नम्रता या मृदुता से जीतें















