तप के द्वारा पूजा (प्रतिष्ठा) की अभिलाषा नहीं करनी चाहिये
तप से पूजा की कामना न करें
नो पूयणं तवसा आवहेज्जा
कल्पना कीजिये – एक नौका में बैठकर कुछ यात्री नदी पार कर रहे हैं| वे देखते हैं कि नौका में पानी भरने लगा है और इससे धीरे-धीरे नौका डूबने की सम्भावना पैदा हो गई है| वे तत्काल नौका के छिद्रों को ढूँढते हैं, जहॉं से पानी भीतर प्रवेश कर रहा है| Continue reading “तप से पूजा की कामना न करें” »
जीव और शरीर
ओ जीवो अं सरीरं
जीव अन्य है, शरीर अन्य
पाप न करें, न करायें
पावकम्मं नेव कुज्जा न कारवेज्जा
पापकर्म न स्वयं करना चाहिये और न दूसरों से कराना चाहिये
मूर्ख की संगति न करें
अलं बालस्स संगेणं
बाल (अज्ञानी या मूर्ख) की संगति नहीं करनी चाहिये
अनित्यता
अनित्यं हि जगत् सर्वम्
श्री प्रसन्न्चंद्र राजर्श्री
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आंखें जहां भी तुम देखो

आंखें जहां भी तुम देखो ऐसी हो जाएं शुद्ध कि वहीं परमात्मा दिखाई पड़े
इंद्रियां भी उसी के लिए द्वार बन सकती हैं| और हम इंद्रिय प्रार्थना में संलग्न हो सकती है| और उसी को हम कलाकार कहेंगे जो सारी इंद्रियों को परमात्मा में संलग्न कर दे; जो आत्मा से ही न पुकारे, देह से भी पुकारे| Continue reading “आंखें जहां भी तुम देखो” »















