
विणए ठविज्ज अप्पाणं, इच्छंतो हियमप्पणो
आत्महितैषी साधक अपने को विनय में स्थिर करे
किसी बैलगाड़ी या तॉंगे में बैठने वाला व्यक्ति स्थिर रहने का चाहे कितना भी प्रयास क्यों न करे, उसका बदन हिलता ही रहेगा| इसके विपरीत जमीन पर अथवा किसी शिला पर बैठने वाले व्यक्ति पायेंगे; कि उनका शरीर स्थिर है| शरीर की अस्थिरता या स्थिरता उसके आधार पर अवलम्बित है|
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