
पियमप्पियं सव्वं तितिक्खएज्जा
प्रिय हो या अप्रिय-सबको समभाव से सहना चाहिये
सदा प्रिय वस्तुओं का ही संयोग नहीं होता – सर्वत्र प्रशंसा ही प्राप्त नहीं होती – सभी लोक कोमल मीठे वचन ही नहीं बोला करते; किन्तु हमें अनेक बार अप्रिय वस्तुएँ भी प्राप्त होती हैं – हमारी निन्दा भी होती है – कठोर शब्दों को सुनने का अवसर आता है; सबकुछ समभावपूर्वक हमें सहना चाहिये – ऐसा वीतरागदेवों का आदेश है| सहिष्णुता वीरता का प्रतीक है और असहिष्णुता कायरता का|
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