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धर्म कहॉं टिकता है ?

धर्म कहॉं टिकता है ?

सोही उज्जुअभूयस्स, धम्मो सुद्धस्स चिट्ठइ

ऋजु या सरल आत्मा की शुद्धि होती है और शुद्ध आत्मा में ही धर्म ठहरता है

जिस व्यक्ति में सरलता होती है, उसीकी आत्मा शुद्ध होती है| इसके विपरीत जिसमें कुटिलता होती है; उसकी आत्मा शुद्ध हो-यह सम्भव नहीं है| Continue reading “धर्म कहॉं टिकता है ?” »

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अवक्तव्य

अवक्तव्य

जं छं तं न वत्तव्वं

जो गोपनीय हो उसे न कहें

जो गोपनीय बात हो, उसे गुप्त ही रखनी चाहिये| समय या योग्य अवसर आने पर ही उसका प्रकाशन उपयुक्त होता है| Continue reading “अवक्तव्य” »

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