श्री कुंथुनाथ जिन स्तवन
कुंथुजिन! मनडुं किमही न बाजे,
हो कुंथुजिन! मनडुं किमही न बाजे;
जिम जिम जतन करीने राखुं,
तिम तिम अलगुं भाजे हो
श्री कुंथुनाथ जिन स्तवन
कुंथुजिन! मनडुं किमही न बाजे,
हो कुंथुजिन! मनडुं किमही न बाजे;
जिम जिम जतन करीने राखुं,
तिम तिम अलगुं भाजे हो
राग : गुरु बिन कौन बतावे वाट वागेश्वरी
भाव : विषय लगन नी चाह ने मिटाववा माटे नु दर्दभर्यु ब्यान
विषयकी कैसे कटे मोरी चाह,
करती यह फनाह.
पांच ईन्द्रियो पोषे इसको,
मन हैं ईसका नाह.
मेरे प्रान आनन्दघन तान आनन्दघन ॥ ए आंकणी॥
मात आनन्दघन, तात आनन्दघन
गात आनन्दघन, जात आनन्दघन
राग : धनाश्री
भाव : जगद्गुरु हीर सूरिजी म. सा. नुं जीवन वृत्तांत
श्री हीरसूरि गुरुराय,
हमारा हीरसूरि गुरुराय
प्रणमुं प्रभावक पाय,
हमारा हीरसूरि गुरुराय
तेरी हुं तेरी हुं कहुं री,
इन बातमें दगो तुं जाने
तो करवत काशी जाय ग्रहुं री.
भाव : ३ वर्षना बालमुनि वज्रस्वामी ने एमना जीवन नी अद्भुत कहानी
सांभळजो तुमे अद्भुत वातो,
वयर कुंवर मुनिवरनी रे;
षट् महिनाना गुरु झोळीमां,
आवे केलि करंता रे,
त्रण वरसना साधवी मुखथी,
अंग अगीयार भणंता रे.
श्री पार्श्वनाथ जिन स्तवन
(राग : राता जेवा फुलडाने)
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राग : बागेश्चरी
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राग : प्रभातीयु
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रातडी रमीने अहियांथी आविया ॥ए देशी॥
मूलडो थोडो भाई व्याजडो घणोरे,
केम करी दीधोरे जाय?
तलपद पूंजी में आपी सघलीरे,
तोहे व्याज पूरुं नवि थाय