1 0 Tag Archives: आचार्य लब्धि सूरीजी
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करवुं होय ते थाय करमने

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राग : लख्युं होय ते थाय भविष्यमां सजनवा वैरी हो गइ हमार
भाव : कर्मसत्तानी अमाप ताकात अने ए ताकातने पडकारती धर्मसत्ता

करवुं होय ते थाय करमने करवुं होय ते थाय;
जीवे जाच्युं काम न आवे,
धार्युं निरर्थक जाय.

…करमने.१

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विषयकी कैसे कटे मोरी चाह

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राग : गुरु बिन कौन बतावे वाट वागेश्‍वरी
भाव : विषय लगन नी चाह ने मिटाववा माटे नु दर्दभर्यु ब्यान

विषयकी कैसे कटे मोरी चाह,
करती यह फनाह.
पांच ईन्द्रियो पोषे इसको,
मन हैं ईसका नाह.

…विषयकी.१

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श्री हीरसूरि गुरुराय

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राग : धनाश्री
भाव : जगद्गुरु हीर सूरिजी म. सा. नुं जीवन वृत्तांत

श्री हीरसूरि गुरुराय,
हमारा हीरसूरि गुरुराय
प्रणमुं प्रभावक पाय,
हमारा हीरसूरि गुरुराय

…हमारा.१

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सांभळजो तुमे अद्भुत वातो

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भाव : ३ वर्षना बालमुनि वज्रस्वामी ने एमना जीवन नी अद्भुत कहानी

सांभळजो तुमे अद्भुत वातो,
वयर कुंवर मुनिवरनी रे;
षट् महिनाना गुरु झोळीमां,
आवे केलि करंता रे,
त्रण वरसना साधवी मुखथी,
अंग अगीयार भणंता रे.

…सां.१

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चोत्रीश अतिशयवंत

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भाव : दान धर्म…ना बधाज मुख्य प्रकारनी समजण

चोत्रीश अतिशयवंत,
समवसणे बेसी हो जगगुरु;
उपदेशे अरिहंत,
दानतणा गुण हो पहेले सुखकरू.

…१

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मनडुं हाथन आवे हो, पद्म प्रभ!

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श्री पद्मप्रभु जिन स्तवन
राग : मनडुं किम हि न बाजे हो कुंथुजिन…
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शील सुरंगीरे सुलसा महासती

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राग : अरणीक मुनिवर चाल्या गोचरी
भाव : सुलसा महासतीना समकित-समता शील नी सुगंध

शील सुरंगीरे सुलसा महासती,
वर समकित गुण धारीजी;
राजगृही पूरे नाग रथिक तणी,
सुलसा नामे नारीजी.

…शी.१

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अरज सुनो प्रभु अनंत जिणंदा

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श्री अनंतनाथ जिन स्तवन
राग : कल्याणअरज सुनो प्रभु अनंत जिणंदा
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मनमें ही वैरागी

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राग : पहेले दिन बहु आदर आणी आशावरी
भाव : संसारना सुख भोग वच्चे चक्रवतू भरत महाराजानी वैराग्य साधना

मनमें ही वैरागी, भरतजी;
मनमें ही वैरागी;
सहस बत्रीश मुगुट बंध राजा,
सेवा करे वड भागी.
चोसठ सहस अंतेउरी जाके,
तोही न हुवा अनुरागी.
भरत मनमें ही वैरागी.

…१

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प्राणी सब चेतो

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राग : माढ. मेरे गमका तराना
भाव : परनारी त्याग ने पापत्यागनी प्रेरणा

प्राणी सब चेतो, बात लो ए तो,
दिल विषे उतार;
तुम आतम तारी, सुख करनारी,
बात हमारी दिल विषे उतार.
पाप न करना, दु:खसे डरना,
हरना विषय कषाय;
परनारीको मात समजकर,
उससे लो दिल हटाय रे.

…प्राणी.१

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