अज्ञान के अतिरिक्त कोई अन्धकार है ही नहीं
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अनुभव ! तुं है हितु हमारो,
आय उपाय करो चतुराई, और को संग निवारो,
अनुभव ! तुं है हितु हमारो
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जो अनन्यदर्शी होता है, वह अनन्याराम होता है और जो अनन्याराम होता है, वह अनन्यदर्शी होता है
जो एक को जानता है, वह सबको जानता है और जो सबको जानता है, वह एक को जानता है
जिसे आत्मस्वरूप का सम्यग्ज्ञान हो जाता है, वह अनात्मतत्त्वों में रमण नहीं करता; क्यों कि वह आत्मभि पदार्थों के स्वरूप को – उनकी क्षणिकताको भी जान लेता है| Continue reading “एकज्ञ-सर्वज्ञ” »
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सिकंदरने युद्धमें पौरस को हराकर बंदी बनाया| पौरसको सिकंदर के सामने लाया गया| तब सिकंदरने पौरस को कहा- ‘‘कहो ! आपके साथ कैसा व्यवहार करें?’’ तब पौरसने निर्भयता से कहा कि एक राजा का दूसरे राजा के साथ जैसा व्यवहार होना चाहिए, ठीक वैसा ही व्यवहार कीजिए| सिकंदर इस जवाब से प्रसन्न हो गया|
क्षमा-याचना करने वाली दोषित व्यक्ति के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए ? इस प्रश्न का जवाब यह है कि स्वयंको दोषित समजनेवाला जिस तरह व्यवहार करता है, ठीक उसी तरह व्यवहार करना चाहिए| तात्पर्य यह है कि स्वयंको दोषित माननेवाला ही अन्य के दोषको मामूली समजकर सरलतासे, सहजतासे क्षमा प्रदान कर सकता है| Continue reading “क्षमा-प्रदान करते समय” »