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Best conduct

Best conduct

जं सेयं तं समायरे

Whatever be the best, act accordingly

Most of the living beings of this world, bereft of their vision, have become the slaves of beauty and melody. Day and night they think of sense gratification. Worldly pleasure might be momentary; still, they invest their life’s invaluable time in pursuit of those; it must be said that they waste their time.

Like a poisonous fruit, the result of short-term pleasures is pain – they forget this. Their attention is not on the past or future, only on the present. That is why they are not able to see the ugliness behind the beauty and bitterness hidden in the sweet.

Wise men take advantage of the experience and considering the future consequences conduct themselves in the present – they better themselves. Smilingly, they withstand the present pains for the future gains. They select the best between the beneficent and the most liked and act as such.

- Dasavaikalika Sutra 4/11

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2 Comments

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  1. Dilip Parekh
    Mar 20, 2016 #

    जो भी उत्तम हो उसको कार्यान्वित करो.

    ज्यादातर लोग ‘सौन्दर्य और संगीत’ के गुलाम होजाते है. दिन-रात वे इन्द्रियसुखके बारेमें सोचते है. यही दुन्यवी सुखभोग उनके लिए बहुत महत्त्वपूर्ण बात होती है. और उसमें वे सारा समय लगाते है. जिंदगीका अमूल्य समय इसी रीतिसे बिताना यानि व्यर्थ कर देना.

    जैसे विषेला फल मृत्यु कराता है, वैसे ‘शोर्ट पीरियड’ के भोग दुःख-रोग उत्पन्न करते है, यह वे भूल जाते है. उनका ध्यान भुत-भविष्य कीओर न होते हुए, केवल वर्तमान के उपभोग में ही होता है. इसी कारन सुन्दरता के पीछे छिपा बेडोलपना और मिठाई में छिपी कडवाहट उन्हें नहीं दिखती.

    सज्जन और समजदार अनुभव का लाभ उठाता है. भविष्य अच्छा हो इसीलिए अपने वर्तमानको सुधारता है. स्वयं को अच्छा बनाता है. और जो जो अच्छा और उत्तम है उसको आचरण में लाता है.

  2. Dilip Parekh
    Mar 20, 2016 #

    जो भी उत्तम हो उसको कार्यान्वित करो.

    ज्यादातर लोग ‘सौन्दर्य और संगीत’ के गुलाम होजाते है. दिन-रात वे इन्द्रियसुखके बारेमें सोचते है. यही दुन्यवी सुखभोग उनके लिए बहुत महत्त्वपूर्ण बात होती है. और उसमें वे सारा समय लगाते है. जिंदगीका अमूल्य समय इसी रीतिसे बिताना यानि व्यर्थ कर देना.

    जैसे विषेला फल मृत्यु कराता है, वैसे ‘शोर्ट पीरियड’ के भोग दुःख-रोग उत्पन्न करते है, यह वे भूल जाते है. उनका ध्यान भुत-भविष्य की ओर न होते हुए, केवल वर्तमान के उपभोग में ही होता है. इसी कारन सुन्दरता के पीछे छिपा बेडोलपना और मिठाई में छिपी कडवाहट उन्हें नहीं दिखती.

    सज्जन और समजदार अनुभव का लाभ उठाता है. भविष्य अच्छा हो इसीलिए अपने वर्तमानको सुधारता है. स्वयं को अच्छा बनाता है. और जो जो अच्छा और उत्तम है उसको आचरण में लाता है.

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