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प्राणवध कैसा है?

प्राणवध कैसा है?

पाणवहो चंडो रुद्दो, खुद्दो, अणारियो,
निग्धिणो, निसंसो, महब्भभओ

प्राणवध चण्ड है, रौद्र है, क्षुद्र है, अनार्य है, करुणारहित है, क्रूर है, भयंकर है

प्राणवध का अर्थ है – प्राणों की हिंसा, प्राणों का नाश| इसका स्वरूप प्रकट करते हुए अथवा इसका परिचय देते हुए ज्ञानियों ने कहा है :- प्राणवध बड़ा ही प्रचण्ड है-उग्र है-असह्य है; क्योंकि इसे कोई सह नहीं सकता|

इसके अतिरिक्त यह रौद्र है| ध्यान चार प्रकार के माने गये हैं – आर्त्तध्यान, रौद्रध्यान, धर्मध्यान और शुक्लध्यान | इनमें से पहले दो अप्रशस्त हैं और अन्तिम दो प्रशस्त | इनमें से रौद्रध्यान नामक अप्रशस्त ध्यान करनेवाला व्यक्ति ही प्राणवध करता है| अतःप्राणवध रौद्र माना गया है |

फिर क्षुद्र (तुच्छ) व्यक्ति ही हिंसा के लिए प्रवृत्त होते हैं, इसलिए प्राणवध को क्षुद्र कहा गया है| आर्य लोग ऐसा कार्य नहीं करते; इसलिए उसे अनार्य भी कहते हैं| निष्करुण व्यक्ति ही क्रूरतापूर्वक प्राणों की हिंसा करते हैं; अतः प्राणवध करुणारहित है – क्रूर है|

इससे प्राणियों के मन में बहुत बड़े भय का संचार होता है और वे वध का दृश्य देखकर कॉंपने लगते हैं; इसलिए वह महान भयंकर है| इस प्रकार समझाया गया है कि प्राणवध कैसा है?

- प्रश्‍नव्याकरण 1/1

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