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शस्त्र या अशस्त्र ?

शस्त्र या अशस्त्र ?

अत्थि सत्थं परेण परं|
नत्थि असत्थं परेण परं||

शस्त्र एक से एक बढ़कर हैं, परन्तु अशस्त्र (अहिंसा) एक से एक बढ़कर नहीं है

इस दुनिया में हिंसा के साधन अनेक हैं और वे एक से एक बढ़कर हैं| तलवार, भाला, तीर, बन्दूक, तोप, बम और परमाणुबम (हाइड्रोजन बम) क्रमशः भयंकर से भयंकर संहारक अस्त्र हैं| यदि राष्ट्रों की आँखों से स्वार्थान्धता की पट्टी न हटी; तो भविष्य में और भी भयंकर शस्त्रों के निर्माण की सम्भावना है| सन् 1914 और 1936 के दो विश्‍वयुद्धों के भयंकर दुष्परिणाम दुनिया देख चुकी है, फिर भी तीसरे विश्‍वयुद्ध की तैयारियॉं चल रही हैं – कैसी मूढ़ता है यह?

इसके विपरीत अशस्त्र या अहिंसा का साधन एक ही है – दया| इस क्षेत्र में एक से एक बढ़कर साधन नहीं पाये जाते| शस्त्रों के प्रयोग में अशान्ति है – युद्ध है – क्रूरता है, परंतु अहिंसा में शान्ति है – सहयोग है – दयालुता है| हमें क्या ग्रहण करना चाहिये – शस्त्र या अशस्त्र? स्वयं सोचें|

- आचारांग सूत्र 1/3/4

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