साधो भाई ! समता रंग रमीजे,
अवधू ! ममता संग न कीजे,
साधो भाई ! समता रंग रमीजे.
संपत्ति नाहि नाहि ममता में रमता राम समेटे,
खाट पाट तजी लाख खटाउ अंत खाख में लेटे.
साधो भाई ! समता रंग रमीजे
मेरी तुं मेरी तुं कांही डरेर
मेरी तुं मेरी तुं कांही डरेर, मेर
कहे चेतन समता सुनि आखर, और दैढ दिन जूठ लरेरी.
बनी मिट्टी की सब बाजी
राग : गझल
भाव : आत्मा एक सोनुं बाकी बधु माटी… माटे आत्मा दशानी शोधनो संदेश
बनी मिट्टीकी सब बाजी, उसीमें होत क्यों राजी
मिट्टी का है शरीर तेरा, मिट्टीका कपडा पहेरा;
मिट्टी का म्हेल रहा छाजी, उसीमें होत क्यों राजी.
पंथडो निहाळुं रे
श्री अजितनाथ जिन स्तवन
राग : आशावरी – ‘‘मारुं मन मोह्युं रे श्री सिद्धाचले रे…’’ ए देशी
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तुम दरिशन भले पायो
श्री ऋषभदेव जिन स्तवन
राग : परदीप
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प्रणमुं तुमारा पाय
भाव : मन… चंचलता मननी निर्मलता मननी निश्चलता
प्रसन्नचंद्रनी ७मी नरक अनुत्तर विमान.. ने केवलज्ञाननी साधना
प्रणमुं तुमारा पाय,
प्रसन्नचंद्र प्रणमुं तुमारा पाय;
तुमे छो मोटा ऋषिराय…
राज छोडी रळीयामणुं रे, जाणी अथीर संसार,
vवैरागे मन वाळीयुं रे, लीधो संयम भार
मत बन विषय विलासी रे मनवा
राग : कित गुण भयो है उदासी बिहाग
भाव : विषय विलास = आत्म विनाश एना त्यागनी पावन प्रेरणा
मत बन विषय विलासी रे मनवा,
ए जबरी जग फांसी. रे मनवा.
हतस्त हरिण मच्छ भ्रमर पतंग,
एक एक विषयना आशी.
जनक सुता हुं नाम
भाव : महासती सीतानो रावणने पडकार ने शील दृढता
जनक सुता हुं नाम धरावुं,
राम छे अंतर जामी;
पालव मारो मेलोने पापी,
कुळने लागे छे खामी.
अडशो मांजो, मांजो मांजो मांजो मांजो अडशो,
म्हारो नावलीयो दुहवाय,
मने संग केनो न सुहाय;
म्हारुं मन मांहेथी अकळाय.
नाथ कहे तुं सुणने नारी
भाव : नारी ने नारायणी बनावती हितशिक्षा
नाथ कहे तुं सुणने नारी, शिखामण छे सारी जी;
वचन ते सघळां वीणी लेशे, तेहना कारज सरशे, शाणी थइए ज.
पूरण सुख शिवसद्मना
श्री श्रेयांश्नाथ जिन स्तवन
राग : परमातम पूरण कला…
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