श्री अभिनंदन जिन स्तवन
राग : भैरवी
Continue reading “प्रभु! तेरे नयनकी बलिहारी” »
प्रभु! तेरे नयनकी बलिहारी
प्रीतम माहरो रे
श्री ऋषभदेव जिन स्तवन
राग : मारु – ‘‘करम परीक्षा करण कुमार चाल्यो…’’ ए देशी
ऋषभ जिनेसर प्रीतम माहरो रे,
ओर न चाहुं रे कंत;
रीझ्यो साहिब संग न परिहरे रे,
भांगे सादि अनंत.
मनमें ही वैरागी
राग : पहेले दिन बहु आदर आणी आशावरी
भाव : संसारना सुख भोग वच्चे चक्रवतू भरत महाराजानी वैराग्य साधना
मनमें ही वैरागी, भरतजी;
मनमें ही वैरागी;
सहस बत्रीश मुगुट बंध राजा,
सेवा करे वड भागी.
चोसठ सहस अंतेउरी जाके,
तोही न हुवा अनुरागी.
भरत मनमें ही वैरागी.
वीर जिनेश्वर चरणे लागुं
श्री महावीर जिन स्तवन
Continue reading “वीर जिनेश्वर चरणे लागुं” »
दुलह नारी तुं बडी बावरी
दुलह नारी तुं बडी बावरी
पिया जागे तुं सोवे
पिया चतुर हम निपट अग्यानी
न जानु क्या होवे?
न जानु क्या होवे?
प्राणी सब चेतो
राग : माढ. मेरे गमका तराना
भाव : परनारी त्याग ने पापत्यागनी प्रेरणा
प्राणी सब चेतो, बात लो ए तो,
दिल विषे उतार;
तुम आतम तारी, सुख करनारी,
बात हमारी दिल विषे उतार.
पाप न करना, दु:खसे डरना,
हरना विषय कषाय;
परनारीको मात समजकर,
उससे लो दिल हटाय रे.
श्री सीमंधर स्वामी, मुक्तिना गामी
श्री सीमंधर स्वामी जिन स्तवन
राग : माढ.., नेमि जिन प्यारा…
श्री सीमंधर स्वामी, मुक्तिना गामी, दीठे परमानंद,
प्रभु सुमति आपो, कुमति कापो, टाळो भवभयङ्गंद,
कर्म अरिगण दूर करीने,
तोडो भवतरू कंद रे.
बंभसारे वनमां भमतां
राग : नवो वेष रचे
भाव : जीवननी अनाथता नो परिचय ने श्रेणीक ने अनाथी मुनिनो सद्बोध
बंभसारे वनमां भमतां,
ऋषी दीठो रयवाडी रमतां;
रुप देखीने मने रीझयो,
भारे करमी पण भदज्यो.
अनुभव ! तुं है हितु हमारो
अनुभव ! तुं है हितु हमारो,
आय उपाय करो चतुराई, और को संग निवारो,
अनुभव ! तुं है हितु हमारो









