श्री महावीर जिन स्तवन
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वीर जिनेश्वर चरणे लागुं
दुलह नारी तुं बडी बावरी
दुलह नारी तुं बडी बावरी
पिया जागे तुं सोवे
पिया चतुर हम निपट अग्यानी
न जानु क्या होवे?
न जानु क्या होवे?
प्राणी सब चेतो
राग : माढ. मेरे गमका तराना
भाव : परनारी त्याग ने पापत्यागनी प्रेरणा
प्राणी सब चेतो, बात लो ए तो,
दिल विषे उतार;
तुम आतम तारी, सुख करनारी,
बात हमारी दिल विषे उतार.
पाप न करना, दु:खसे डरना,
हरना विषय कषाय;
परनारीको मात समजकर,
उससे लो दिल हटाय रे.
श्री सीमंधर स्वामी, मुक्तिना गामी
श्री सीमंधर स्वामी जिन स्तवन
राग : माढ.., नेमि जिन प्यारा…
श्री सीमंधर स्वामी, मुक्तिना गामी, दीठे परमानंद,
प्रभु सुमति आपो, कुमति कापो, टाळो भवभयङ्गंद,
कर्म अरिगण दूर करीने,
तोडो भवतरू कंद रे.
बंभसारे वनमां भमतां
राग : नवो वेष रचे
भाव : जीवननी अनाथता नो परिचय ने श्रेणीक ने अनाथी मुनिनो सद्बोध
बंभसारे वनमां भमतां,
ऋषी दीठो रयवाडी रमतां;
रुप देखीने मने रीझयो,
भारे करमी पण भदज्यो.
अनुभव ! तुं है हितु हमारो
अनुभव ! तुं है हितु हमारो,
आय उपाय करो चतुराई, और को संग निवारो,
अनुभव ! तुं है हितु हमारो
मोह से तेरा कमाया
राग : एशके सामान सब एक दिन यहां रह जायेंगे
भाव : दुन्यवी चीजनी नश्वरता, आवता जन्मनी चिंता
मोहनो त्याग ने धर्मनो राग
मोह से तेरा कमाया, धन यहां रह जायगा;
प्रेमसे अति पुष्ट कीया, तन जलाया जायगा.
प्रभुभजनकी भावना बीन, परलोकमें क्या पायेगा
कुच्छ कमाइ यहां न कीनी, खाली हाथे जायेगा.
अनुभव नाथ कुं क्युं न जगावे
अनुभव नाथ कुं क्युं न जगावे?
आतम अनुभव फूल की, नवली कोउ रीत;
नाक न पकरे वासना, कान गहे परतीत ॥
अनुभव नाथ कुं क्युं न जगावे?
ममता संग सो पाय अजागल-थनतें दूध दुहावे
तारा रे नयनां प्याला
श्री शंखेश्वर पार्श्व जिन स्तवन
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