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निशदिन जोवुं वाटडी

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निशदिन जोवुं वाटडी घर आवो रे ढोला,
मुज सरिखी तुज लाख हैमेरे तू ही ममोला.

…निशदिन.१

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मनडुं हाथन आवे हो, पद्म प्रभ!

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श्री पद्मप्रभु जिन स्तवन
राग : मनडुं किम हि न बाजे हो कुंथुजिन…
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शील सुरंगीरे सुलसा महासती

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राग : अरणीक मुनिवर चाल्या गोचरी
भाव : सुलसा महासतीना समकित-समता शील नी सुगंध

शील सुरंगीरे सुलसा महासती,
वर समकित गुण धारीजी;
राजगृही पूरे नाग रथिक तणी,
सुलसा नामे नारीजी.

…शी.१

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हो अविनाशी

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श्री पद्मप्रभु जिन स्तवन
राग : सुण चंदाजी…
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अभिनंदन जिन! दरिसण तरसीए

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श्री अभिनंदन जिन स्तवन
राग : धन्यासिरि-सिंधुओ – “आज निहेजो रे दीसे नाईलो रे…’’ ए देशी

अभिनंदन जिन! दरिसण तरसीए,
दरिसण दुरलभ देव;
मत मत भेदे रे जो जई पूछीए,
सहु थापे अहमेव.

…अभिनंदन.१

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देखण दे रे, सखी!

Listen to देखण दे रे, सखी!

श्री चंद्रप्रभ जिन स्तवन
राग : केदारो तथा गोडी – ‘‘कुमारी रोवे, आक्रंद करे, मु कोई मुकावे…’’ ए देशी

देखण दे रे, सखी!
मुने देखण दे, चंद्रप्रभ मुखचंद,
उपशमरसनो कंद, सखी.
गत कलि-मल-दु:खदंद..

…सखी.१

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क्या सोवे उठ जाग बाउ रे

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क्या सोवे उठ जाग बाउ रे,
अंजलि जल ज्युं आयु घटत है
देत पहोरिया घरिय घाउ रे…
क्या सोवे उठ जाग बाउ रे

…१

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मेरे घट ग्यान भानु भयो भोर

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मेरे घट ग्यान भानु भयो भोर
मेरे घट ग्यान भानु भयो
भोर चेतन चकवा चेतना चकवी,
भागो विरह को सोर…
मेरे घट ग्यान भानु भयो भोर.

…१

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अरज सुनो प्रभु अनंत जिणंदा

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श्री अनंतनाथ जिन स्तवन
राग : कल्याणअरज सुनो प्रभु अनंत जिणंदा
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