आज सुहागन नारी अवधू ! आज सुहागन नारी,
मेरे नाथ आप सुध लीनी कीनी निज अंगचारी.
अवधू ! आज सुहागन नारी
वीतराग…! तोरा पाय शरणं
श्री सुपार्श्वनाथ जिन स्तवन
Continue reading “वीतराग…! तोरा पाय शरणं” »
मनडुं हाथन आवे हो, पद्म प्रभ!
श्री पद्मप्रभु जिन स्तवन
राग : मनडुं किम हि न बाजे हो कुंथुजिन…
Continue reading “मनडुं हाथन आवे हो, पद्म प्रभ!” »
शील सुरंगीरे सुलसा महासती
राग : अरणीक मुनिवर चाल्या गोचरी
भाव : सुलसा महासतीना समकित-समता शील नी सुगंध
शील सुरंगीरे सुलसा महासती,
वर समकित गुण धारीजी;
राजगृही पूरे नाग रथिक तणी,
सुलसा नामे नारीजी.
हो अविनाशी
श्री पद्मप्रभु जिन स्तवन
राग : सुण चंदाजी…
Continue reading “हो अविनाशी” »
अभिनंदन जिन! दरिसण तरसीए
श्री अभिनंदन जिन स्तवन
राग : धन्यासिरि-सिंधुओ – “आज निहेजो रे दीसे नाईलो रे…’’ ए देशी
अभिनंदन जिन! दरिसण तरसीए,
दरिसण दुरलभ देव;
मत मत भेदे रे जो जई पूछीए,
सहु थापे अहमेव.
देखण दे रे, सखी!
श्री चंद्रप्रभ जिन स्तवन
राग : केदारो तथा गोडी – ‘‘कुमारी रोवे, आक्रंद करे, मु कोई मुकावे…’’ ए देशी
देखण दे रे, सखी!
मुने देखण दे, चंद्रप्रभ मुखचंद,
उपशमरसनो कंद, सखी.
गत कलि-मल-दु:खदंद..
क्या सोवे उठ जाग बाउ रे
क्या सोवे उठ जाग बाउ रे,
अंजलि जल ज्युं आयु घटत है
देत पहोरिया घरिय घाउ रे…
क्या सोवे उठ जाग बाउ रे
मेरे घट ग्यान भानु भयो भोर
मेरे घट ग्यान भानु भयो भोर
मेरे घट ग्यान भानु भयो
भोर चेतन चकवा चेतना चकवी,
भागो विरह को सोर…
मेरे घट ग्यान भानु भयो भोर.









