तेरी हुं तेरी हुं कहुं री,
इन बातमें दगो तुं जाने
तो करवत काशी जाय ग्रहुं री.
तेरी हुं तेरी हुं कहुं री
सांभळजो तुमे अद्भुत वातो
भाव : ३ वर्षना बालमुनि वज्रस्वामी ने एमना जीवन नी अद्भुत कहानी
सांभळजो तुमे अद्भुत वातो,
वयर कुंवर मुनिवरनी रे;
षट् महिनाना गुरु झोळीमां,
आवे केलि करंता रे,
त्रण वरसना साधवी मुखथी,
अंग अगीयार भणंता रे.
भगवान पार्श्वनाथ – मोरा पासजी हो लाल
श्री पार्श्वनाथ जिन स्तवन
(राग : राता जेवा फुलडाने)
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तारो मोहे स्वामी
श्री अभिनंदन जिन स्तवन
राग : बागेश्चरी
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जाग तुं जाग तुं आतमा माहरा
श्री ऋषभदेव (आदिनाथ) जिन स्तवन
राग : प्रभातीयु
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मूलडो थोडो भाई व्याजडो घणोरे
रातडी रमीने अहियांथी आविया ॥ए देशी॥
मूलडो थोडो भाई व्याजडो घणोरे,
केम करी दीधोरे जाय?
तलपद पूंजी में आपी सघलीरे,
तोहे व्याज पूरुं नवि थाय
क्यारे मुने मिलश्ये
क्यारे मुने मिलश्ये माहरो संत सनेही?
क्यारे मुने मिलश्ये माहरो संत सनेही?
संत सनेही सुरीजन पाखे राखे न धीरज देही
क्यारे मुने मिलश्ये माहरो संत सनेही?
अवधू! क्या मागुं गुनहीना
अवधू! क्या मागुं गुनहीना?
वे गुनगनन प्रवीना,
अवधू! क्या मागुं गुनहीना?
गाय न जानुं बजाय न जानुं न जानुं सुरभेवा,
रीझ न जानुं रीझाय न जानुं न जानुं पदसेवा.
क्युं न हो सुनाइ स्वामी
श्री सुपार्श्वनाथ जिन स्तवन
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एक मुज विनती निसुणोज़
श्री मुनिसुव्रत स्वामी जिन स्तवन
मुनिसुव्रत जिनराय,
एक मुज विनती निसुणोज़
आतमतत्त्व क्युं जाणुं जगद्गुरु,
एह विचार मुज कहीयो;
आतमतत्त्व जाण्या विण निरमल,
चित्तसमाधि नवि लहियो









