जो अति मात्रा में अ-जल ग्रहण नहीं करता, वही निर्ग्रन्थ है
अति मात्रा में नहीं लेते
अनन्यदर्शी बनें
जो अनन्यदर्शी होता है, वह अनन्याराम होता है और जो अनन्याराम होता है, वह अनन्यदर्शी होता है
एकज्ञ-सर्वज्ञ
जे सव्वं जाणइ से एगं जाणइ||
जो एक को जानता है, वह सबको जानता है और जो सबको जानता है, वह एक को जानता है
जिसे आत्मस्वरूप का सम्यग्ज्ञान हो जाता है, वह अनात्मतत्त्वों में रमण नहीं करता; क्यों कि वह आत्मभि पदार्थों के स्वरूप को – उनकी क्षणिकताको भी जान लेता है| Continue reading “एकज्ञ-सर्वज्ञ” »
जीवन की क्षणभुंगरता
आयु बीत रही है और युवावस्था भी
मन के जीते जीत
किं ते जुज्झेण बज्झओ ?
आन्तरिक विकारों से ही युद्ध कर, बाह्य युद्ध से तुझे क्या लाभ?
वीर्यको न छिपायें
वीर्य को छिपाना नहीं चाहिये
जो बुद्धिमान हैं, उन्हें अपनी बुद्धि का उपयोग दूसरों के झगड़े मिटाने में करना चाहिये| Continue reading “वीर्यको न छिपायें” »
मृत्यु का आगमन
मृत्यु किसी भी समय आ सकती है
लोभ को छोड़िये
लद्धे कामे नाभिगाहइ
लोभ को अलोभ से तिरस्कृत करनेवाला साधक प्राप्त कामों का भी सेवन नहीं करता
सत्य में धैर्य
सत्य में धृति करो-स्थिर रहो
संग्रह न करे !
अधिक प्राप्त होने पर भी संग्रह नहीं करना चाहिये


















