वओ अच्चेति जोव्वणं च
आयु बीत रही है और युवावस्था भी
आयु बीत रही है और युवावस्था भी
आन्तरिक विकारों से ही युद्ध कर, बाह्य युद्ध से तुझे क्या लाभ?
वीर्य को छिपाना नहीं चाहिये
जो बुद्धिमान हैं, उन्हें अपनी बुद्धि का उपयोग दूसरों के झगड़े मिटाने में करना चाहिये| Continue reading “वीर्यको न छिपायें” »
मृत्यु किसी भी समय आ सकती है
लोभ को अलोभ से तिरस्कृत करनेवाला साधक प्राप्त कामों का भी सेवन नहीं करता
सत्य में धृति करो-स्थिर रहो
अधिक प्राप्त होने पर भी संग्रह नहीं करना चाहिये
मत्त को सब ओर से भय रहता है, किन्तु अप्रमत्त को किसी भी ओर से भय नहीं रहता
शंकाशील व्यक्ति को कभी समाधि नहीं मिलती
आतुर परिताप देते हैं