
मेरी समता हर स्थिति में बनी रहे…..जो स्वीकार भाव की क्षमता को बढ़ा सकता है वही सुख-चैन से जी सकता है| Continue reading “समता रखो” »
लाइफ स्टाइल
मेरी समता हर स्थिति में बनी रहे…..जो स्वीकार भाव की क्षमता को बढ़ा सकता है वही सुख-चैन से जी सकता है| Continue reading “समता रखो” »

गुरु भगवंत को विधिपूर्वक वन्दन करता हूँ… नमस्कार करता हूँ… सत्कार करता हूँ… सम्मान करता हूँ… Continue reading “गुरुदेव को वन्दन” »

अतीत का महत्त्व है इससे इन्कार नहीं है| उसे यूँ ही भुलाकर नहीं रहा जा सकता… परन्तु कदम-कदम पर अतीत की दुहाई देना… उसी से चिपटे रहना स्वयं को खतरे में डालना है| अतीत की स्मृति भले ही रहे परन्तु दृष्टि तो भविष्य की ओर केन्द्रित रहनी चाहिए…| हम क्या थे इसकी अपेक्षा अधिक महत्त्वपूर्ण यह देखना है कि अब हमें क्या बनना है?
समय के साथ आगे चलना और देखना जरूरी है| पिछले समय से तो मात्र शिक्षा लेनी चाहिए… यदि मनुष्य का पीछे की ओर देखना जरूरी होता तो आँखें आगे की बजाय पीछे होती| कहा जाता है कि भूत के पैर पीछे की ओर उलटे होते हैं… अतः इस बात को याद रखकर आगे बढ़ना|
यह घर मेरा नहीं है|
संसार की कोई भी जड़ चेतन वस्तु मेरी नहीं है|
क्या है तेरा ? Continue reading “यह मेरा नहीं है…” »