न प्रहृष्येत्प्रियं प्राप्य नोद्विजेत् प्राप्य चाप्रियम्
प्रशंसा हो या निंदा, सत्कर्म करते रहो
यह पुण्य से मिला है
शुभानुबन्ध्यतः पुण्यं कर्त्तव्यं सर्वथा नरैः
उत्तम मां-बाप पुण्य से मिले हैं|
मानव का देह पुण्य से मिला है| Continue reading “यह पुण्य से मिला है” »
मेरा सिद्धान्त
एगो मे सासओ अप्पा नाणदंसणसंजुओ
दुःख पाप से मिलता है| Continue reading “मेरा सिद्धान्त” »
साहसी बालक
परोपकारः कर्त्तव्यः प्राणैरपि धनैरपि
डिट्टा का भाग्य

एक गॉंव में एक आदमी रहता था| उसे लोग डिट्टा कहकर बुलाते थे| वह कुछ भी पढ़ा लिखा नहीं था, इसलिए बेकार था| Continue reading “डिट्टा का भाग्य” »
अनमोल शिक्षा
नो हीलए नो वि य खिंसएज्जा
पुष्प समान जीवन मिले

गुरुजनों का प्रदेश… अर्थात गुर्जर देश… पिया के घर जाती हुई एक नयी नवेली दुल्हन ने… गरवी गुजरात के राष्ट्रसंत श्री रविशंकर महाराज से चरण स्पर्श कर आशिष मॉंगा…| Continue reading “पुष्प समान जीवन मिले” »
आनंद की साधना
आज्ञा तु निर्मलं चित्तं कर्त्तव्यं स्फटिकोपमम्
समय का सदुपयोग
कालेण काले विहरेज्जा
ज्ञान की रोशनी
नमो नमो नाणदिवायरस्स















