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यथावादी तथाकारी

यथावादी तथाकारी

करणसच्चे वट्टमाणे जीवे
जहावाई तहाकारी या वि भवइ

करणसत्य में रहनेवाला जीव जैसा बोलता है, वैसा ही करता है

जो कभी पाप न स्वयं करता है, न दूसरों से कराता है और न किसी पापी के कार्यों का अनुमोदन ही करता है, वह करण सत्य में रहनेवाला जीव है| ऐसे सज्जन व्यक्ति का व्यवहार शुद्ध और सच्चा होता है| उसके मन-वचन और काया के व्यापारों में एकता होती है|

दुर्जन व्यक्ति के कार्य उसकी वाणी के अनुरूप नहीं होते और उसकी वाणी उसके विचारों के अनुरूप नहीं होती| वह कहता कुछ और है एवं करता कुछ और ही है| ऐसे व्यक्ति का भला कौन विश्‍वास करेगा?

इसके विपरीत सज्जन व्यक्ति सबके विश्‍वासपात्र होते हैं; क्यों कि वे जैसा कहते हैं; वैसा ही करते हैं| दूसरे शब्दों में वे ‘यथावादी तथाकारी’ होते हैं|

- उत्तराध्ययन सूत्र 26/51

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