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अतिवेल न बोलें

अतिवेल न बोलें

नाइवेलं वएज्जा

अधिक समय तक एवं अमर्याद न बोलें

‘वेला’ का अर्थ समय भी होता है और मर्यादा भी; इसलिए इस सूक्ति के दो अर्थ होते हैं|

पहला अर्थ यह है कि साधक को अधिक देर तक नहीं बोलना चाहिये| बहुत-से व्यक्तियों को अधिक बोलने की आदत पड़ जाती है| यदि उन्हें अवसर मिलता जाये तो वे दिन-रात बोलते ही रहेंगे| ऐसे व्यक्ति फूटे मटके की तरह होते हैं| उसमें जैसे पानी टिक नहीं पाता, उसी प्रकार बकवादियों के भी पेट में कोई बात टिक नहीं पाती| साधक संयमी होता है| उसे वाणी पर भी संयम रखने का अभ्यास करना चाहिये, जिससे कि वह कम से कम समय में अपनी बात कह सके|

सूक्ति का दूसरा अर्थ यह है कि बोलने में मर्यादा का अतिक्रमण न किया जाये| उदाहरणार्थ बड़ों की बात के बीच में न बोलें – जहॉं ‘आप’ शब्द का प्रयोग करना हो, वहॉं ‘तू’ या ‘तुम’ का प्रयोग न करें – सावद्य भाषा में न बोलें – हिंसा के या किसी भी पाप के प्रेरक वचन बोलें आदि|

इस प्रकार ‘‘अतिवेल’’ शब्द के दोनों अर्थ यहॉं अभीष्ट होने से अपनी बात संक्षेप में किस प्रकार कही जाये ? इसका उदाहरण स्वयं यह सूक्ति है !

- सूत्रकृतांग सूत्र 1/14/25

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2 Comments

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  1. Jashvant Shah
    मार्च 7, 2013 #

    Jai jinendra. This Sutra very nicely points towards : Bhasha Samiti and Vachan Gupti.

  2. Brahm Parsh
    अक्टूबर 18, 2016 #

    The article means a lot and very meaningful.

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