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बन्धनमुक्त करें

बन्धनमुक्त करें

एस वीरे पसंसिए, जे बद्धे पडिमोयए

वही वीर प्रशंसनीय बनता है, जो बद्ध को प्रतिमुक्त करता है

तलवार से मनुष्य अपने हाथ-पॉंव भी काट सकता है और दूसरों के बन्धन भी – हाथों से वह दूसरों को तमाचे भी मार सकता है और उनकी सहायता भी कर सकता है| इसी प्रकार उसमें जो शक्ति है, उसका वह सदुपयोग भी कर सकता है और दुरुपयोग भी | शक्ति भी तलवार की तरह एक हथियार है – एक साधन है| प्रशंसा और निन्दा दोनों उससे प्राप्त की जा सकती हैं|

जो अपनी शक्ति से दूसरों के कष्ट बढ़ाता है – दूसरों को बन्धन में डालता है, उसकी कौन प्रशंसा करेगा? सर्वत्र उसकी निन्दा ही होगी – यह निश्चित है|

इसके विपरीत जो दूसरों के बन्धन खोलता है उसकी शक्ति सर्वत्र उसे प्रशंसा दिलाती है| भगवान श्री महावीरस्वामी का कथन है – उपदेश है कि यदि आप वीर हैं – आपमें वीरता के गुण हैं; तो दूसरों को बन्धनमुक्त करें !

- आचारांग सूत्र 1/2/5

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